घायल वित्त मंत्रालय के उप सचिव नवजोत सिंह को 19 किमी दूर गगनप्रीत के पिता के अस्पताल ले जाने पर उठ रहे आरोपित गंभीर सवाल (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पटियाला हाउस स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने बीते वर्ष हुए बीएमडब्ल्यू हादसा मामले में दिल्ली पुलिस के आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए आरोपित गगनप्रीत कौर मक्कड़ को समन जारी किया है। इस हादसे में वित्त मंत्रालय के उप सचिव नवजोत सिंह की मौत हो गई थी। कोर्ट ने आरोपित महिला को दो फरवरी को पेश होने का निर्देश दिया है।
घायल को जानबूझकर दूर ले गए
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अंकित गर्ग ने कहा कि आरोपपत्र और उसके साथ संलग्न दस्तावेज के अवलोकन से प्रथम दृष्टया अपराध बनता है। अदालत ने बीएनएस की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), 281, 125(बी) और 238(ए) के तहत संज्ञान लिया। दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि हादसा आरोपित की गलती से हुआ और घायल को जानबूझकर दूर स्थित अस्पताल ले जाया गया।
इससे ट्रामा के गोल्डन आवर का नुकसान हुआ। पुलिस के मुताबिक, घटनास्थल के पास आर्मी बेस हास्पिटल और एम्स ट्रामा सेंटर जैसे अस्पताल 10-15 मिनट की दूरी पर थे, लेकिन घायल को जीटीबी नगर स्थित न्यूलाइफ अस्पताल ले जाया गया, जो लगभग 20 किमी दूर है और वहां पहुंचने में 23 मिनट लगे।
एंबुलेंस सहायता अस्वीकार कर दी
आरोपपत्र में कहा गया है कि समय पर चिकित्सा सहायता मिलती तो पीड़ित की जान बच सकती थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित का सर्वाइवल टाइम कम से कम 15 मिनट था। पुलिस का दावा है कि घटनास्थल पर पैरामेडिक के साथ एंबुलेंस कुछ ही मिनटों में पहुंच गई थी, लेकिन आरोपित ने एंबुलेंस सहायता अस्वीकार कर दी। एंबुलेंस स्टाफ की किसी भी तरह की लापरवाही नहीं पाई गई है।
मेडिकल रिकाॅर्ड में हेरफेर की जांच जारी
पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपित ने जांच को गुमराह करने के प्रयास में मामूली चोटों के बावजूद खुद को आइसीयू में भर्ती कराया। मेडिकल रिकाॅर्ड में किसी संभावित हेरफेर की भी जांच जारी है। न्यूलाइफ अस्पताल को आरोपपत्र में सीमित सुविधाओं वाला दो-मंजिला नर्सिंग होम बताया गया है।
डीटीसी चालक का बयान भी रिकाॅर्ड पर
मामले में कुल 34 गवाह हैं और 400 से अधिक दस्तावेज के साथ आरोपपत्र दाखिल किया गया है। बीएमडब्ल्यू से स्पीड रिपोर्ट हासिल की गई है, जबकि वाहन की गति की पुष्टि के लिए एफएसएल जांच भी कराई जा रही है। एंबुलेंस चालक व सहायक के बयान बीएनएसएस की धारा 180 के तहत दर्ज किए गए हैं, डीटीसी चालक का बयान भी रिकाॅर्ड पर है।
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