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सांसद अमृतपाल सिंह।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब के लोकसभा हल्के खडूर साहिब से सांसद और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में बंद खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को आगामी बजट सत्र में लोकसभा की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति में फैसला 7 कार्य दिवस में आ सकता है। इस मुद्दे पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को सात कार्यदिवस के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
यह आदेश जस्टिस संजीव बेरी के मामले से अलग होने के एक दिन बाद शुक्रवार को चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस अर्चना पुरी की खंडपीठ ने पारित किया। अमृतपाल सिंह, जो वर्ष 2023 से असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं, ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि उन्हें 28 जनवरी से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में भाग लेने के लिए पैरोल दी जाए और इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएं।
अदालत के समक्ष यह स्पष्ट किया गया कि याचिकाकर्ता स्वतः संसद में उपस्थित होने का अधिकार नहीं मांग रहे, बल्कि केवल उनकी ओर से दी गई अभ्यावेदन पर सरकार द्वारा समयबद्ध निर्णय चाहते हैं।
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अमृतपाल 32 बैठकों में अनुपस्थित रहे
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने अदालत को बताया कि अमृतपाल सिंह की अब तक की अनुपस्थिति को लोकसभा द्वारा काफी हद तक माफ किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि लोकसभा के नियमों के अनुसार कोई सांसद तभी अयोग्य ठहराया जा सकता है जब वह बिना अनुमति 60 बैठकों तक अनुपस्थित रहे।
अब तक अमृतपाल सिंह 32 बैठकों से अनुपस्थित रहे हैं और ये सभी अनुपस्थिति पहले ही माफ की जा चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि औपचारिक आवेदन दिया जाए तो हिरासत में होने के कारण अनुपस्थित रहने पर आमतौर पर संसद शेष बैठकों के लिए भी माफी दे देती है।
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7 दिन बाद फैसला तुरंत अमृतपाल तक पहुंचाने का निर्देश
याचिकाकर्ता की ओर से वकील ने आग्रह किया कि राज्य सरकार को पांच दिन का समय दिया जाए, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने यह इंगित किया कि बीच में तीन अवकाश पड़ रहे हैं, जिससे प्रभावी समय बहुत कम रह जाएगा। इस पर खंडपीठ ने निर्देश दिया कि सक्षम प्राधिकारी, यानी पंजाब के गृह सचिव, सात कार्यदिवस के भीतर अमृतपाल सिंह की अभ्यावेदन पर निर्णय लें।
हाईकोर्ट ने यह भी विशेष रूप से कहा कि निर्णय होने के तुरंत बाद उसकी सूचना जेल में बंद अमृतपाल सिंह और उनके वकील दोनों को बिना किसी देरी के दी जाए, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
पहले भी कर चुके कोर्ट का रुख
गौरतलब है कि “वारिस पंजाब दे” संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह ने इससे पहले शीतकालीन सत्र में भाग लेने के लिए भी ऐसी ही अनुमति मांगी थी, लेकिन राज्य सरकार ने उसे खारिज कर दिया था। उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, पर तब तक शीतकालीन सत्र समाप्त हो जाने के कारण मामला निष्प्रभावी हो गया था।
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