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उत्तर प्रदेश के जौनपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि 24 साल के एक युवक ने NEET के जरिए मेडिकल एडमिशन में दिव्यांग कोटे का फायदा लेने के लिए अपने पैर का एक हिस्सा खुद काट लिया। पुलिस के मुताबिक युवक की पहचान सूरज भास्कर के रूप में हुई है। वह लाइन बाजार पुलिस स्टेशन इलाके के खलीपुर का रहने वाला है। यह घटना 18 जनवरी की बताई जा रही है, लेकिन इसका खुलासा 23 जनवरी को हुआ। पुलिस पहले इस मामले को झूठे हमले की शिकायत मानकर जांच कर रही थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पूरी सच्चाई सामने आई।
दिव्यांग सर्टिफिकेट पाने की कोशिश
पुलिस के अनुसार, सूरज भास्कर ने दिव्यांग (PwD) सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए अपने पैर का एक हिस्सा खुद काट लिया। ऐसा करने का मकसद मेडिकल एडमिशन में मिलने वाली रियायतों का फायदा उठाना था। इन रियायतों में NEET जैसी परीक्षाओं में कम क्वालिफाइंग प्रतिशत की सुविधा भी शामिल होती है। पुलिस ने बताया कि सूरज भास्कर ने फार्मेसी में डिप्लोमा (D.Pharm) किया हुआ है और वह MBBS में दाखिले के लिए NEET की तैयारी कर रहा था।
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गर्लफ्रेंड से हुई कॉल से साजिश का खुलासा
शुरुआत में सूरज के मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की कोशिश का केस दर्ज किया था। सूरज का कहना था कि उस पर हमला हुआ और हमलावरों ने उसे विकलांग बना दिया। सर्किल ऑफिसर (सिटी) गोल्डी गुप्ता के मुताबिक, रविवार 18 जनवरी को पुलिस को सूचना मिली कि दोपहर के समय सूरज पर हमला किया गया है। पुलिस को दिए गए शुरुआती बयान में सूरज ने बताया था कि जब उसे अगली सुबह होश आया, तो उसका बायां पैर कटा हुआ था और सिर्फ एड़ी बची थी।
सूरज के बयान और लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली और मामले की जांच शुरू की। लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को सूरज की बातों में कई विरोधाभास नजर आने लगे, जिससे पूरे मामले पर शक गहराता चला गया।
बार-बार बदल रहा था अपना बयान
सर्किल ऑफिसर (सिटी) गोल्डी गुप्ता ने बताया कि सूरज बार-बार अपना बयान बदल रहा था और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने कहा कि इसी वजह से जांच टीम को उस पर और ज़्यादा शक होने लगा। पुलिस के अनुसार, बयान में लगातार आ रहे विरोधाभासों को देखते हुए मामले की गहराई से जांच की गई। जांच के दौरान पुलिस ने सूरज के कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकाले। इससे पता चला कि वह एक महिला के साथ रिश्ते में था और उससे शादी करना चाहता था। इसके बाद पुलिस ने उस महिला से भी पूछताछ की। गुप्ता ने बताया कि गर्लफ्रेंड से हुई पूछताछ और आगे की जांच में यह साफ हुआ कि सूरज किसी भी हालत में साल 2026 में MBBS कोर्स में दाखिला लेना चाहता था और इसी मकसद से वह यह कदम उठाने के लिए तैयार हो गया।
हालांकि यह सूरज की पहली कोशिश नहीं थी। इस कदम से पहले वह अक्टूबर में दिव्यांग से जुड़े जरूरी दस्तावेज़ बनवाने के लिए बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) भी गया था, लेकिन वहां उसे सफलता नहीं मिली। पुलिस के मुताबिक, सूरज का पैर बहुत साफ तरीके से काटा गया था। ऐसा लग रहा था कि किसी मशीन का इस्तेमाल किया गया हो। पैर को किसी धारदार हथियार से काटे जाने के कोई सबूत नहीं मिले।
सर्किल ऑफिसर (सिटी) गोल्डी गुप्ता ने बताया कि पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), BTS और टावर डंप की भी जांच की। इन इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से साफ हो गया कि सूरज पर कोई हमला नहीं हुआ था। न तो आधी रात को कोई उससे मिलने आया था और न ही किसी बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी के सबूत मिले।
खेत में इंजेक्शन मिलने से शक और गहराया
अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने निर्माणाधीन घर और उसके आसपास तलाशी ली, लेकिन कटा हुआ पैर कहीं नहीं मिला। हालांकि पास के खेत में कुछ इंजेक्शन जरूर मिले, जो एनेस्थीसिया से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस ने बताया कि सूरज भास्कर के पास फार्मेसी की डिग्री है, जिससे यह शक और मजबूत हो गया कि उसे इंजेक्शन लगाना आता था। पुलिस का मानना है कि उसने दर्द से बचने के लिए पहले खुद को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया और फिर अपना पैर काट लिया।
सर्किल ऑफिसर (सिटी) गोल्डी गुप्ता ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया है कि सूरज ने सुबह करीब 5 बजे अपने परिवार वालों को फोन किया था, लेकिन किसी ने कॉल नहीं उठाई। इसके बाद उसने एक रिश्तेदार को फोन किया, तब जाकर परिवार को घटना की जानकारी मिली। जांच के दौरान पुलिस को सूरज की एक डायरी भी मिली। पुलिस के अनुसार, वह इस डायरी में अपने लक्ष्य लिखा करता था। किसी भी काम को शुरू करने से पहले वह उसे नोट करता था। डायरी में उसने साल 2026 में MBBS में एडमिशन लेने का लक्ष्य भी लिखा था। इसके अलावा उसने शादी का रजिस्ट्रेशन फॉर्म भी भर रखा था। |
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