सरस्वती पूजा 2026
जागरण संवाददाता, पटना। विद्या, बुद्धि, ज्ञान, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा शुक्रवार को माघ शुक्ल पंचमी पर की जाएगी। बसंत पंचमी का पर्व इस वर्ष पांच शुभ योग के उत्तम संयोग में मनाया जाएगा। श्रद्धालु पूरे दिन मां बागेश्वरी की पूजा-अर्चना कर ज्ञान प्राप्ति और अज्ञानता के नाश की कामना करेंगे।
सरस्वती पूजा पर मां शारदे के साथ भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, नवग्रह, पुस्तक-लेखनी और वाद्य यंत्रों की भी विधिवत पूजा की जाएगी। पूजा के बाद नवजात और छोटे बच्चों का पारंपरिक अक्षरारंभ संस्कार कराया जाएगा।
आचार्य राकेश झा ने बताया कि शिक्षा आरंभ करने से बालक में ज्ञान, संस्कार और विवेक का विकास होता है। इस दौरान माता-पिता, गुरु, आचार्य और पुरोहित बच्चों को ॐ, श्री और अ जैसे अक्षरों से लेखन की शुरुआत कराएंगे।
श्रीकृष्ण ने किया था मां सरस्वती का पूजन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ शुक्ल पंचमी को योगेश्वर श्रीकृष्ण ने पीतांबर धारण कर मां सरस्वती की पूजा की थी। पीला रंग गुरु ग्रह से जुड़ा है। जिसे ज्ञान, धन और शुभता का प्रतीक माना जाता है। यह रंग स्नायु तंत्र को संतुलित रखने, मस्तिष्क को सक्रिय करने और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में सहायक होता है। इस कारण से इस दिन पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा है।
मिट्टी की प्रतिमा का पूजन सर्वोत्तम
शास्त्रों के अनुसार सरस्वती माता की मिट्टी से बनी प्रतिमा का पूजन शुभ माना गया है। मिट्टी की प्रतिमा में पंचतत्व पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश समाहित होते हैं। इससे प्रतिमा में दिव्यता और सात्विक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही मिट्टी की प्रतिमाएं जल में आसानी से विलीन हो जाती हैं। जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
- पंचमी तिथि: देर रात 12:22 बजे तक
- अमृत मुहूर्त: सुबह 6:38 बजे से 10:40 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:40 बजे से 12:23 बजे तक
- शुभ योग: दोपहर 12:01 बजे से 1:22 बजे तक
- वृष लग्न: दोपहर 12:28 बजे से 2:25 बजे तक
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