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ओडिशा में अब गुटखा, खैनी, जर्दा सब पर बैन! सरकार ने कंपनियों के छल को भी किया बंद

Chikheang 2026-1-22 12:26:51 views 1234
  

ओडिशा में अब गुटखा, खैनी, जर्दा सब पर बैन



जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। वर्ष 2013 में राज्य में गुटखा को प्रतिबंधित किए जाने के बाद राज्य सरकार ने अब एक और बड़ा कदम उठाया है।तंबाकू और निकोटिनयुक्त सभी उत्पादों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।इनके उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री को राज्य में प्रतिबंधित घोषित किया गया है।इस संबंध में गुरुवार को राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जर्दा, खैनी, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन कैंसर का प्रमुख कारण है। इसके अलावा धुआंरहित तंबाकू जैसे पान मसाला, पान, सुपारी, धुआं पत्ता आदि अन्य उत्पाद भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
42 प्रतिशत आबादी धुआंरहित तंबाकू का सेवन

वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण के दूसरे चरण में यह सामने आया था कि ओडिशा की 42 प्रतिशत आबादी धुआंरहित तंबाकू का सेवन करती है, जो कि राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुना है। इसी तरह खाद्य सुरक्षा और मानक (निषेध और बिक्री प्रतिबंध) नियम, 2011 के तहत तंबाकू और निकोटिनयुक्त उत्पादों के उपयोग पर रोक लगाई गई है।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2013 में तंबाकू और निकोटिनयुक्त उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था। लेकिन बाद में यह देखा गया कि गुटखा कंपनियां एक पैकेट में तंबाकू और दूसरे पैकेट में चबाने वाले पदार्थ बेच रही थीं, जिससे लोग दोनों को मिलाकर पहले की तरह सेवन कर रहे थे। इस तरह तंबाकू और निकोटिनयुक्त कई उत्पाद अलग-अलग नामों से बाजार में उपलब्ध हो रहे थे।
निकोटिनयुक्त उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तंबाकू और निकोटिनयुक्त उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठाया गया है।इसके तहत चबाने वाले या अन्य सुगंधित तंबाकू उत्पादों की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया गया है।  

साथ ही पैकेट में या बिना पैकेट के बिकने वाले ऐसे उत्पाद, जो आसानी से अन्य पदार्थों के साथ मिलाए जा सकते हैं, उनकी बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है।नई अधिसूचना जारी होने के साथ ही वर्ष 2013 में राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई पुरानी अधिसूचना को रद्द कर दिया गया है।
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