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गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस में क्या है अंतर? आसान शब्दों में दूर करें बच्चों का कन्फ्यूजन

LHC0088 1 hour(s) ago views 581
  

15 अगस्त और 26 जनवरी में क्या है फर्क? (Picture Courtesy: Freepik)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के इतिहास में 15 अगस्त और 26 जनवरी, ये दो तारीखें स्वर्ण अक्षरों में लिखी जा चुकी हैं। एक हमारा स्वतंत्रता दिवस है और दूसरा गणतंत्र दिवस। ये दोनों ही हमारे राष्ट्रीय पर्व हैं, लेकिन फिर भी कई बार लोग इनके बीच अंतर नहीं समझ पाते या इन्हें एक दूसरे कन्फ्यूज कर बैठते हैं। बच्चों के साथ यह समस्या काफी ज्यादा होती है।   

लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर आप स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के बीच का अंतर समझ सकते हैं। आइए जानें स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के बीच क्या अंतर है?
ऐतिहासिक महत्व

स्वतंत्रता दिवस- 15 अगस्त 1947 को भारत को लगभग 200 सालों के ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी। यह दिन उन क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने का दिन है, जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

गणतंत्र दिवस- आजादी के बाद भी भारत का अपना कोई संविधान नहीं था। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना। इस दिन देश को चलाने के लिए लिखित संविधान अपनाया गया था।

  

(Picture Courtesy: Freepik)
ध्वजारोहण और झंडा फहराना

अक्सर लोग इसे एक ही समझते हैं, लेकिन इन दोनों कार्यक्रमों में तकनीकी अंतर है-

15 अगस्त (ध्वजारोहण)- इस दिन राष्ट्रीय ध्वज को नीचे से रस्सी खींचकर ऊपर ले जाया जाता है और फिर फहराया जाता है। इसे \“ध्वजारोहण\“ कहते हैं, जो नए राष्ट्र के उदय और ब्रिटिश गुलामी के अंत का प्रतीक है।

26 जनवरी (झंडा फहराना)- गणतंत्र दिवस पर झंडा पहले से ही खंभे के ऊपर बंधा होता है। राष्ट्रपति केवल रस्सी खींचकर उसे खोलते हैं। इसका मतलब है कि देश पहले से आजाद है और अब वह अपने संवैधानिक मूल्यों को प्रदर्शित कर रहा है।
मुख्य अतिथि और आयोजन स्थल

मुख्य नेतृत्व- 15 अगस्त को देश के राजनीतिक प्रमुख यानी प्रधानमंत्री लाल किले पर ध्वजारोहण करते हैं। वहीं, 26 जनवरी को देश के संवैधानिक प्रमुख यानी राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर झंडा फहराते हैं।

स्थान- स्वतंत्रता दिवस का मुख्य कार्यक्रम दिल्ली के लाल किले पर होता है, जबकि गणतंत्र दिवस का भव्य समारोह कर्तव्य पथ पर आयोजित किया जाता है।
उत्सव का स्वरूप

स्वतंत्रता दिवस- इस दिन का मुख्य आकर्षण प्रधानमंत्री का भाषण होता है, जिसमें वे राष्ट्र के नाम संदेश देते हैं और देश की उपलब्धियों पर चर्चा करते हैं। यह दिन देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत होता है।

गणतंत्र दिवस- यह समारोह बेहद भव्य और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करने वाला होता है। कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना की अलग-अलग टुकड़ियों की परेड, अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक झाकियां और आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया जाता है। इस दिन किसी विदेशी देश के राष्ट्राध्यक्ष को \“मुख्य अतिथि\“ के रूप में आमंत्रित करने की परंपरा है।

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