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दिल्ली की सड़कों पर मौत बनकर दौड़ी बसें। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। पिछले साल यानी पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में दिल्ली की सड़कों पर बसों से लगभग 150 हादसे हुई, जिनमें 40 लोगों की जान गई है। इससे सार्वजनिक वाहनों से सड़क सुरक्षा के मुद्दे उठ रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसें 2024-25 में 97 सड़क हादसों में शामिल थीं, जिनमें से 21 जानलेवा थे, जिसके परिणामस्वरूप यात्रियों और पैदल चलने वालों की जान गई और वे घायल हुए।
यातायात नियमों के उल्लंघन के अलावा डेडिकेटेड बस लेन की कमी, खराब प्रशिक्षण वाले बस चालक ड्राइवर, ओवर-स्पीडिंग और मैकेनिकल खराबी भी इन हादसों के लिए जिम्मेदार माने गए हैंं।
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दिल्ली सरकरा के आंकड़े
दिल्ली सरकार के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार जहां 15 हादसों को बड़े हादसों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, वहीं अधिकांश हादसे (61) छोटी श्रेणी के थे। हादसों में शामिल सभी बसें डीटीसी द्वारा संचालित 12-मीटर लंबी स्टैंडर्ड लो-फ्लोर बसें थीं।
अधिकारियों ने कहा कि शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों में सड़कों पर भारी ट्रैफिक और लेन अनुशासन की थोड़ी भी परवाह किए बिना चलने वाले वाहनों के कारण ये बड़ी बसें हादसों का शिकार होती हैं।
आंकड़ों से पता चला कि दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी माडल ट्रांजिट सिस्टम (डिम्ट्स ) द्वारा संचालित क्लस्टर बसें 2024-25 में 50 हादसों का शिकार हुईं। इनमें से चालीस प्रतिशत हादसे जानलेवा थे। इनमें 20 लोगों की जान गई है। हादसों के अलावा, क्लस्टर बसें 12 बड़े और 18 छोटे हादसों में भी शामिल थीं।
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