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मणिकर्णिका में तोड़फोड़ के वायरल वीडियो के विरोध में भाजपा व सरकार उतरी मैदान में, बताया पूरा सच

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मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई होलकर के धरोहर को क्षतिग्रस्त होने के कारण ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकने की मांग को लेकर मुख्यालय पर एकत्रित होकर जिलाधिकारी को ज्ञापन देने जाते कांग्रेस कार्यकर्ता। जागरण



जागरण संवाददाता, वाराणसी। महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास के दौरान बुलडोजर से यहां की मढ़ी (चबूतरा) व इस पर सजी अहिल्याबाई की मूर्ति/कलाकृति के तोड़े जाने के प्रसारित वीडियो को लेकर गुरुवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय व सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत अन्य नेताओं ने एक्स पर निंदा करते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया था।

इसके बाद प्रशासन चूक स्वीकारते हुए अहिल्याबाई की मूर्ति समेत अन्य कलाकृतियों को होलकर परिवार के प्रतिनिधि को दिखाते हुए सहेजकर रखे जाने व घाट के पुनर्विकास के बाद इसे पुन: स्थापित कर इस मामले के पटाक्षेप में जुटा हुआ था लेकिन शुक्रवार को भाजपा व सरकार इस प्रसारित वीडियो को भ्रामक, एआइ से सृजन करने की बात कहते हुए विपक्ष पर जमकर हमला बोला।

मर्णिकर्णिका घाट पर तोड़फोड़ के वायरल वीडिया में \“AI\“ का इस्तेमाल : रवींद्र जायसवाल

स्टांप एवं पंजीयन शुल्क राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा कि भाजपा वाराणसी में अनवरत विकास को नया आयाम दे रही है। सनातन का सम्मान भाजपा के अलावा किसी अन्य पार्टी ने अब तक नहीं किया। अहिल्याबाई की जयंती भाजपा ने मनाना शुरू किया।

नव्य भव्य श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद अहिल्याबाई की एक भव्य मूर्ति भाजपा की ओर से ही स्थापित की गई। मणिकर्णिका घाट पर हुई तोड़फोड़ व कलाकृतियों को गलत ढंग से दिखाने में एआइ का इस्तेमाल किया गया है। जबकि घाट पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

स्टांप मंत्री सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह भी कहा कि मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास के दौरान कलाकृतियों को हटाकर संस्कृति विभाग के गुरुधाम स्थित परिसर में सुरक्षित रखा गया है। मणिकर्णिका के विकास के बाद घाट पर पुन: मढ़ी का निर्माण कर सभी कलाकृतियों को पुन: उसी ढंग से लगाकर सजाया व संवारा जाएगा। इस घाट के निर्माण के बाद स्थानीय लोगों को सर्वाधिक लाभ मिलेगा। प्रदूषण से लोगों को राहत मिलेगी।

चिमनी के निर्माण के साथ शव जलाने के लिए 38 प्लेटफार्म का निर्माण होगा। काशी की कला व संस्कृति को समेटे यह घाट नव्य भव्य दिखेगा। विपक्ष इसको भ्रामक ढंग से प्रस्तुत कर रहा है। यह वहीं लोग हैं जिन्होंने बाबा विश्वनाथ धाम के निर्माण के दौरान खूब अफवाहें फैलाई थीं।

पाल विकास समिति के संरक्षक भइयालाल पाल ने कहा कि महाश्मशान के पुनर्विकास के दौरान अहिल्याबाई की प्रतिमा के साथ महादेव व गणेश जी की प्राचीन प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने से पाल समाज के लोगों में रोष व्याप्त है। सारनाथ स्थित राही टूरिस्ट बंगलो में शुक्रवार को आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि प्रतिमा क्षतिग्रस्त होना प्रशासन की लापरवाही है।

डीएम ने एक्स पर रखा पक्ष, भ्रामक सूचनाओं पर न दें ध्यान

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने एक्स पर लिखा है कि मणिकर्णिका घाट पर पौराणिक काल से बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार के लिए आते रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में घाट का पुनर्निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य प्रगति पर है। इसके अंतर्गत पुराने घाट की सीढ़ी, कच्चे हिस्से पर सुंदरीकरण किया जा रहा है।

घाट पर स्थित सभी मंदिरों को पूर्ण रूप से संरक्षित किया जाएगा। पुनर्निर्माण क्षेत्र में एक मढ़ी तथा दीवारों पर स्थित कुछ कलाकृतियां भी थीं, जो कार्य के दौरान प्रभावित हुई हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक एवं निराधार दावे प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

तथ्य यह है कि घाट पर मौजूद सभी कलाकृतियों एवं मूर्तियों को संस्कृति विभाग द्वारा विधिवत संरक्षित कर सुरक्षित स्थान पर रखा गया है तथा पुनर्निर्माण कार्य के पश्चात इन्हें पूर्ववत स्वरूप में पुनः स्थापित किया जाएगा। जनसामान्य से आग्रह है कि भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही विश्वास करें। प्रशासन ने अन्य हैंडिल पर भी इसी तरह की अपील जारी की है।

यह भी पढ़ें- मणिकर्णिका घाट पर मूर्ति तोड़ने का क्या है सच? मंत्री रवींद्र जायसवाल के खुलासे से सोशल मीडिया पर मचा हडकंप

विकास नहीं, सुनियोजित रूप से आस्था, इतिहास और संस्कृति का विनाश

मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास के दौरान वहां हुई तोड़फोड़ व धरोहरों के नुकसान को लेकर कांग्रेस ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर सरकार को घेरा। जिला अधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए विरोध दर्ज कराया।

महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि विकास नहीं, वाराणसी में सुनियोजित रूप से आस्था, इतिहास और संस्कृति का विनाश किया जा रहा है। पहले श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के नाम पर सैकड़ों से अधिक मंदिरों और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को तोड़ा। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े प्रतीकों को हटाया गया। अब महाश्मशान मणिकर्णिका घाट क्षेत्र में देवी-देवताओं की मूर्तियां, मंदिरों और धार्मिक प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। क्या काशी की पहचान केवल नवनिर्माण है या उसकी आत्मा, संस्कृति और धार्मिक विरासत को भी बचाव।

कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सच्चाई सामने लाने के लिए तत्काल एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल का गठन किया जाए। इसमें कांग्रेसजन भी शामिल हों। दोषियों पर कार्रवाई हो। काशी की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था की रक्षा के लिए कांग्रेस किसी भी स्तर तक संघर्ष करेगी। प्रतिनिधिमंडल में जिला अध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल, फसाहत हुसैन बाबू, संजीव सिंह, डा. राजेश गुप्ता, सतनाम सिंह, अशोक सिंह, दिलीप चौबे, संतोष चौरसिया, हसन मेहदी कब्बन,पीयूष श्रीवास्तव समेत दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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