क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज कानेल (फोटो- रायटर्स)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज कानेल इन दिनों सुर्खियों में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की धमकियों का जवाब देते हुए उन्होंने साफ कहा कि वे किसी दबाव में झुककर बातचीत नहीं करेंगे।
मिगुएल के अंदर ये मिजाज उनके बचपन से आया है। 1960 में जन्मे मिगुएल की मां एक शिक्षिका थीं, जबकि पिता कारखाने में मजदूर थे। इन अनुभवों ने उनकी सोच को गहराई से प्रभावित किया, जिसने उन्हें सामाजिक न्याय की दिशा में प्रेरित किया।
1982 में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद मिगुएल ने राजनीतिक सफर शुरू किया था। उनकी मुख्य प्राथमिकता कारखानों की स्थिति में सुधार लाना था। क्यूबा की अर्थव्यवस्था में मंदी के दौर में उन्होंने अनोखे उदाहरण पेश किए।
1990 के दशक में जब देश की जीडीपी 36 प्रतिशत तक गिर गई और देश के ऊपर ईंधन संकट गहराया, तब सांता क्लारा प्रांत के सचिव के रूप में उन्होंने वीआईपी संस्कृति को अलविदा कहा। अपनी दो लग्जरी सरकारी कारों को त्यागकर वे रोजाना साइकिल से कार्यालय जाते थे।
परंपराओं को तोड़कर नई छवि गढ़ी
क्यूबा की राजनीति में दशकों से नेता सैन्य वर्दी पहनने की परंपरा निभाते आए थे। मिगुएल ने इस रूढ़िवाद को चुनौती दी।
उन्होंने वर्दी छोड़कर लंबे बाल रखे और जींस-टीशर्ट में सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। अब वे आधुनिक कोर्ट-पैंट में भी दिखाई देते हैं, जो युवा पीढ़ी को आकर्षित करता है।
2019 में राष्ट्रपति बनने के बाद कोरोना महामारी का सामना करना पड़ा। अमेरिकी प्रतिबंधों से दवाओं की आपूर्ति रुक गई, तब उन्होंने वैज्ञानिकों की आपात बैठक बुलाई।
उनके प्रयासों से महज सात सप्ताह में क्यूबा की पहली स्वदेशी वैक्सीन विकसित हुई। इस दौरान भारत ने भी सहायता की, 524 बॉक्स जीवनरक्षक दवाएं भेजकर।
मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक
मिगुएल अपनी मानवीयता के लिए प्रसिद्ध हैं। 1990 के दशक में बिजली संकट के समय सांता क्लारा के एक अस्पताल में लाइट चली गई।
प्रांत सचिव के रूप में वे तुरंत पहुंचे और हर मरीज के बिस्तर पर जाकर हाथ जोड़कर माफी मांगी। उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठे विरोधियों से भी क्षमा याचना की। |
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