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चंडीगढ़ स्टेशन पर आठ मिनट का था हॉल्ट, तीन मिनट में ही रवाना हो गई शताब्दी एक्सप्रेस; ट्रेन से गिरे कई यात्री

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अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर खड़ी शताब्दी ट्रेन। जागरण






  

दीपक बहल, अंबाला। कालका से नई दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस (12006) को समय से पहले दौड़ाने के मामले में रेलवे की प्रारंभिक जांच ने चौंकाने वाली लापरवाही उजागर की है। जांच में सामने आया है कि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर जहां इस ट्रेन का निर्धारित ठहराव आठ मिनट है, वहीं घटना के दिन महज तीन मिनट दो सेकंड में ही ट्रेन को रवाना कर दिया गया।

चंडीगढ़ स्टेशन से शताब्दी एक्सप्रेस में करीब 80 प्रतिशत यात्री सवार होते हैं। जांच में स्पष्ट हुआ कि उस दिन 835 यात्रियों को ट्रेन में चढ़ना था, लेकिन आनन-फानन में ट्रेन दौड़ा दिए जाने से बहुत यात्री प्लेटफार्म पर ही रह गए। एक-दो यात्री गिर भी पड़े। स्थिति बिगड़ती देख यात्रियों ने चेन पुलिंग कर ट्रेन को रोका।
तीन कर्मचारियों पर अटकी जांच की तलवार

मामला उजागर होने के बाद यह प्रकरण अंबाला रेल मंडल से लेकर रेलवे बोर्ड तक पहुंच गया है। प्रारंभिक जांच में शताब्दी एक्सप्रेस के गार्ड, पावर केबिन स्टाफ और हरी झंडी दिखाने वाले ऑपरेटिंग कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। तीनों पर विभागीय जांच की तलवार लटक गई है।

रेलवे सूत्रों के अनुसार, ट्रेन पहले से ही लेट थी और देरी पूरी करने के दबाव में तय समय से पहले ही रवाना कर दी गई। तीन सदस्यीय जांच कमेटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट मंडल अधिकारियों को सौंपेगी, जिसके बाद दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई संभव है।
अंबाला रेल मंडल ने की जांच कमेटी गठित

हालांकि, जांच में यह साफ हुआ है कि लोको पायलट की कोई गलती नहीं थी। उसे हरा सिग्नल मिला और उसने नियमों के अनुसार ट्रेन चला दी। उधर, राजकीय रेलवे पुलिस, चंडीगढ़ ने एक यात्री की शिकायत पर एफआइआर दर्ज किया है।

गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने सबसे पहले यात्रियों से बातचीत कर इस पूरे मामले को उजागर किया, जिसके बाद अंबाला रेल मंडल को जांच कमेटी गठित करनी पड़ी।
एक मिनट और रुक जाती ट्रेन, टल सकता था हादसा

जांच में यह भी सामने आया है कि यदि शताब्दी एक्सप्रेस एक मिनट और रुक जाती, तो सभी यात्री सुरक्षित सवार हो सकते थे। साथ ही एक और गंभीर पहलू उजागर हुआ है। ट्रेन के आटोमैटिक डोर सिस्टम ने भी काम नहीं किया।

दरवाजे अपने आप बंद नहीं हुए, जबकि इस तकनीक पर रेलवे करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है। अब यह भी जांच का विषय है कि महंगी तकनीक होने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था क्यों फेल हुई। जांच कमेटी अपनी अंतिम रिपोर्ट में इन सभी बिंदुओं पर क्या टिप्पणी करती है, इस पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।
ऐसे हुई जांच कमेटी की पूछताछ

अंबाला रेल मंडल की तीन सदस्यीय जांच कमेटी अब तक 10 से अधिक कर्मचारियों से पूछताछ कर चुकी है। रिकार्ड के मुताबिक शताब्दी एक्सप्रेस को चंडीगढ़ स्टेशन पर सुबह 6:45 बजे पहुंचना और 6:53 बजे रवाना होना होता है। घटना वाले दिन ट्रेन पहले ही चार मिनट देरी से पहुंची, इसलिए इसे लेट ही रवाना किया जाना था।

जांच में सामने आया कि यात्रियों को सवार होने के लिए महज तीन मिनट दो सेकंड ही दिए गए। जब गार्ड से सवाल किया गया कि प्लेटफार्म पर यात्री मौजूद होने के बावजूद हरी झंडी क्यों दिखाई गई, तो उसने दावा किया कि प्लेटफार्म खाली था।
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