क्रेडिट लिमिट पर लोन लेकर किया घोटाला।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। कैनरा बैंक से करीब 152 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने फैसला सुनाया है। एसआरएस रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और एसआरएस रियल एस्टेट लिमिटेड को दोषी ठहराया गया।
कंपनी के प्रतिनिधियों अनिल जिंदल, बिशन बंसल, नानक चंद टायल को 5 साल और राजेश सिंगला, सीमा नारंग और धीरज गुप्ता को 4 वर्ष की सजा सुनाई है। 20 से 25 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने सजा पर आदेश सुनाते हुए कहा कि मामले में अभियोजन पक्ष, बचाव पक्ष की दलीलों और सभी प्रासंगिक परिस्थितियों पर विचार किया गया।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषियों को अलग-अलग अवधि की कठोर कारावास (आरएल) की सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
जांच के दौरान गिरफ्तारी नहीं
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि इस पूरे मामले में आरोपितों को न तो जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया था और न ही ट्रायल के दौरान न्यायिक हिरासत में लिया गया। सजा के साथ लगाए गए जुर्माने की राशि सभी दोषियों द्वारा जमा करा दी गई है और उसकी रसीदें विधिवत जारी कर दी गई हैं।
स्वास्थ्य कारणों से जेल में दवा लेने की अनुमति
तीन दोषियों अनिल जिंदल, नानक चंद टायल और सीमा नरंग ने स्वास्थ्य कारणों से जेल में दवा लेने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए जेल मैनुअल के अनुसार चिकित्सक की सलाह और उपलब्ध प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवा उपलब्ध कराने के निर्देश जेल अधीक्षक को दिए हैं।
2020 में सीबीआई ने दर्ज किया था मामला
यह मामला 14 जुलाई 2020 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने करनाल स्थित कैनरा बैंक के सर्कल ऑफिस की शिकायत पर दर्ज किया गया था। आरोप था कि आरोपितों ने आपसी साजिश के तहत बैंक से धोखाधड़ी करते हुए 152 करोड़ रुपये का क्रेडिट लिमिट पर लोन लिया और उस धनराशि का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में किया।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि एसआरएस रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने 42 करोड़ रुपये का क्रेडिट लिमिट लेकर लगभग 41.95 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। वहीं एसआरएस रियल एस्टेट लिमिटेड ने 110 करोड़ रुपये के लोन में से करीब 93.20 करोड़ रुपये की राशि को डमी कंपनियों के जरिये डायवर्ट किया।
इन लेन-देन के पीछे कोई वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि नहीं पाई गई। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 31 दिसंबर 2022 को दो अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किए थे। |
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