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कर्ज और बीमारी की दोहरी मार: 3 बीमार बेटों के इलाज के लिए पिता ने बेच दिया घर, फिर खुद भी हार गया जिंदगी की जंग

LHC0088 2026-1-15 17:57:53 views 522
  

प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



संवाद सहयोगी, जागरण, स्वार। कर्ज के बोझ से परेशान एक वृद्ध ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेज दिया। अचानक हुई इस घटना से स्वजन में चीख-पुकार मची हुई है। जिससे मुहल्ले में शोक व्याप्त हो गया।

तहसील बिलासपुर के थाना खजुरिया क्षेत्र के गांव टेरी ख्वाजा निवासी जुल्फेकार अली (55 वर्ष) मुहल्ला खास स्वार में परिवार के साथ रहकर बकरे खरीदने-बेचने का कार्य कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। मृतक के पांच बच्चे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ समय पूर्व उसके बेटे के ट्यूमर का आपरेशन हुआ था, जिस पर भारी खर्च आया था।
मानस‍िक तनाव में चल रहा था

इसी कारण जुल्फेकार अली पर काफी कर्ज हो गया था और वह लंबे समय से मानसिक तनाव में चल रहा था। स्वजन का आरोप है कि आर्थिक तंगी और कर्ज की वजह से वह बेहद परेशान रहता था। बुधवार की रात किसी समय उसने पड़ोस में ही खाली पड़ी जमीन में एक पेड़ पर रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। गुरुवार सुबह जब लोगों ने पेड़ से शव लटका देखा तो इलाके में हड़कंप मच गया।

घटना के बाद मृतक के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जुल्फेकार अली मेहनती व्यक्ति था, लेकिन आर्थिक परेशानियों ने उसकी जिंदगी छीन ली। सूचना मिलते ही कोतवाल प्रदीप मलिक पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को पेड़ से उतरवाकर कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेज दिया।

वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए फोरेंसिक टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है। इस संबंध में कोतवाल प्रदीप मलिक ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि आत्महत्या के स्पष्ट कारणों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
कर्ज और बीमारी ने छीनी गरीब मजदूर की जिंदगी

नगर के मुहल्ला खास स्वार में रहने वाले एक गरीब मजदूर ने कर्ज और पारिवारिक परेशानियों से तंग आकर आत्महत्या कर ली। घटना से पूरे इलाके में शोक की लहर है। मृतक अपने पीछे पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी को बेसहारा छोड़ गया है। घर में मातम पसरा हुआ है और स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल है। स्वजनों के अनुसार मृतक पिछले कई वर्षों से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था।

रिश्तेदारों और परिचितों से करीब सात से आठ लाख रुपये का कर्ज ले रखा था, जिसे चुकाने की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी। मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण करता था, लेकिन लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों और बीमारियों ने उसकी कमर तोड़ दी। मृतक के तीन बेटों में से एक दिव्यांग है।
आय से अध‍िक था बीमार‍ियों पर खर्चा

दूसरा बेटा दिमाग में ट्यूमर होने के कारण लंबे समय से बीमार चल रहा है, जबकि तीसरे बेटे को हर माह ब्लड चढ़वाना पड़ता है। इन गंभीर बीमारियों के इलाज में होने वाला खर्च परिवार की आय से कहीं अधिक था। इसी कारण मृतक मानसिक तनाव में रहता था। बताया गया कि बीमारी के चलते उसने तहसील बिलासपुर के थाना खजुरिया क्षेत्र के गांव टेरी ख्याजा स्थित अपना मकान बेच दिया था।

बीते आठ वर्षों से स्वार में किराये के मकान में रह रहा था। किराये के मकान मालिक गुड्डू भी उसकी गरीबी और मजबूरी को देखते हुए उससे किराया तक नहीं लेते थे। इसके बावजूद परिवार की जरूरतें और इलाज का खर्च उसे अंदर ही अंदर तोड़ता चला गया। परिवार के लिए जो भी मजदूरी का काम मिलता, उसे करने से पीछे नहीं हटता था।

लेकिन लगातार संघर्ष और हालात से हार मानकर उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आर्थिक तंगी, कर्ज और इलाज के अभाव में गरीब परिवार किस कदर टूट जाते हैं।




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