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भगवान महावीर
जागरण संवाददाता, बिहारशरीफ(नालंदा)। नवादा से पावापुरी तक प्रस्तावित रेलवे लाइन से जहां भगवान महावीर की निर्वाण भूमि विकास की नई पटरी पर आगे बढ़ रही है, वहीं जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर किसानों की चिंताएं भी सामने आ रही हैं। रेल परियोजना से क्षेत्र को बड़ी सौगात मिलने की उम्मीद है, लेकिन उचित मुआवजे की मांग को लेकर प्रभावित किसान प्रशासन की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
रेल लाइन से खुलेगा विकास का नया रास्ता
नवादा से पावापुरी तक प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित रेलवे लाइन को लेकर पावापुरी नगर पंचायत क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों में खुशी का माहौल है।
वर्षों से इस रेल परियोजना की मांग कर रहे स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया है। इस लाइन के शुरू होने से भगवान महावीर की निर्वाण भूमि पावापुरी का सीधा संपर्क नवादा, बिहार शरीफ, पटना सहित अन्य प्रमुख शहरों से हो सकेगा।
आवागमन और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
रेल लाइन के निर्माण से क्षेत्र में आवागमन सुगम होने के साथ-साथ व्यापार और पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। पावापुरी जैन धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं।
रेलवे सुविधा शुरू होने से यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, जिससे स्थानीय रोजगार, होटल व्यवसाय और अन्य सेवाओं को लाभ मिलेगा।
पिलर गाड़ने से बढ़ी किसानों की चिंता
हाल के दिनों में नगर पंचायत पावापुरी क्षेत्र के पूरी गांव में रेलवे द्वारा पिलर गाड़ने का कार्य शुरू किया गया है। इसके बाद से ही जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर किसानों की चिंता सामने आने लगी है।
प्रभावित किसानों का कहना है कि विकास के वे विरोधी नहीं हैं, लेकिन जमीन के बदले उन्हें उचित और पारदर्शी मुआवजा मिलना चाहिए।
आजिविका पर पड़ रहा सीधा असर
किसानों का कहना है कि रेलवे लाइन बनने से जहां क्षेत्र को लाभ होगा, वहीं उनकी खेती और आजिविका पर सीधा असर पड़ रहा है।
किसान संतोष कुमार, मनीष कुमार, पंकज कुमार, विवेकानंद सिंह, नवलेश सिंह, कृष्णकांत सिंह उर्फ फेकन सिंह, मनोज सिंह, दयानंद कुमार और आशुतोष पांडे उर्फ वीगो जी सहित अन्य किसानों ने बताया कि वे स्टेशन से लेकर रेलवे लाइन तक के निर्माण का समर्थन करते हैं, लेकिन इसके बदले पूरा मुआवजा मिलना जरूरी है।
मेडिकल कॉलेज में जा चुकी है आधी जमीन
किसानों ने बताया कि इससे पहले पावापुरी मेडिकल कॉलेज के निर्माण में उनकी आधी जमीन पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है।
उस दौरान कई किसानों को अपेक्षित मुआवजा नहीं मिल पाया, जिससे वे अब तक आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। अब रेलवे परियोजना के लिए दोबारा जमीन लिए जाने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
बाजार दर पर मुआवजे की मांग
प्रभावित किसानों की मांग है कि सरकार वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा तय करे, ताकि वे अपनी आजिविका को फिर से स्थापित कर सकें।
किसानों का कहना है कि यदि मुआवजा समय पर और न्यायसंगत तरीके से दिया जाए, तो वे किसी भी प्रकार का विरोध नहीं करेंगे और विकास कार्यों में पूरा सहयोग देंगे।
प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें
ग्रामीणों ने प्रशासन और रेलवे विभाग से अपील की है कि विकास कार्यों के साथ-साथ किसानों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाए। बिहार शरीफ–नवादा रेलवे लाइन को क्षेत्रीय विकास की रीढ़ माना जा रहा है।
ऐसे में अब सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि किसानों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और मुआवजा प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है। |
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