जागरण संवाददाता, रायबरेली। जलस्तर को सुधारने के लिए हर साल प्रयास होते हैं। नए साल में भी बारिश की एक-एक बूंद को सहेजने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए न सिर्फ चेक डैम बनाए जाएंगे, बल्कि तालाबों का सुदृढ़ीकरण कराया जाएगा।
इसके साथ ही सरकारी भवनाें में रेन वाटर हार्वेस्टिंग और किसानों को प्रोत्साहित करके निजी तालाब बनवाए जाएंगे। इनके जरिए किसान फसलों की सिंचाई करके खेती की लागत कम करेंगे और मत्स्य पालन करके आमदनी बढ़ा सकेंगे। नए साल में बारिश के जल संचयन में 20 करोड़ खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
ट्रीटमेंट कर संरक्षित किया जाएगा वेस्ट वाटर
जल संरक्षण के लिए व भूजल स्तर बढ़ाने के लिए कैच द रेन अभियान चलाया गया। इसके जरिए अमृत सरोवर निर्माण, चेकडैम और रूफटाप हार्वेस्टिंग पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही वेस्ट वाटर का ट्रीटमेंट कर संरक्षित किया जाएगा। इसके जरिए आने वाले वर्षों में वेस्ट वाटर से न केवल खेती की जाएगी, बल्कि उद्योग भी संचालित किए जाएंगे।
इसके तहत 10 लघु किसानों की निजी जमीन पर 20 लाख से तालाब बनवाए जाएंगे। इसके जरिए किसान फसलों की सिंचाई के साथ ही पशुओं के पीने के लिए पानी की व्यवस्था हो सकेगी। जिले के 765 बंधा नाला की सफाई कराकर उनकी मरम्मत कराने का भी लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 10 हजार श्रमिकों को लगाया जाएगा।
इसके साथ ही 10 करोड़ 49 लाख से 295 चेकडैम बनवाने की योजना है। इससे वर्षा का जल रोका जा सकेगा। वहीं 182 तालाबों के सुदृढ़ीकरण के लिए लगभग छह करोड़ 86 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। तालाबाें में बारिश का पानी पहुंच सके, इसके भी इंतजाम किए जाएंगे।
करीब तीन करोड़ की लागत से 120 छोटे तटबंध बनाकर बारिश का पानी रोका जाएगा। 51 सरकारी भवनों से गिरने वाले वर्षा के पानी को भूगर्भ तक पहुंचाने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग लगाया जाएगा। 25 वर्ग मीटर जमीन पर बने भवन पर वाटर हार्वेस्टिंग के लिए 40 हजार रुपये खर्च करने का प्रावधान है।
वर्षा जल संरक्षण के लिए कई योजनाएं बनाई गई हैं। इसमें निजी तालाब, बंधा नाला, चेक डैम, तालाबों का सुदृढ़ीकरण, तटबंध व वाटर हार्वेस्टिंग पर करोड़ों खर्च किए जाएंगे। पानी की एक-एक बूंद सहेजने के लिए विभाग संकल्पित है। विभाग की ओर से जिन भवनों का निर्माण कराया जा रहा है, वहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
-पीएस चंद्रौल, उपायुक्त, मनरेगा, रायबरेली |