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1400 साल पुरानी परंपरा पर आघात! झंडेवालन में हर श्री नाथ जी मंदिर के हिस्से तोड़े जाने से आक्रोश

cy520520 2025-12-9 03:37:56 views 1252
  



झंडेवालान मंदिर में तोड़फोड़ को लेकर डीडीए फिर कठघरे में

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। झंडेवालन मंदिर में ध्वस्तीकरण मामले में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) एक बार फिर कठघरे में आ गया है। इस तोड़फोड़ की जद में आए कुछ हिस्सों को लेकर अलग अलग कहानी सामने आ रही है।

मंदिर में स्थित हर श्री नाथ जी मंदिर, जो पिछले 80 वर्षों से अस्तित्व में है और जिसकी परंपरा लगभग 1400 वर्षों की प्राचीन गोरखनाथ परंपरा से जुड़ी मानी जाती है, भी डीडीए की कार्रवाई के कारण चर्चा में है। मंदिर के सेवकों व श्रद्धालुओं में गहरा आक्रोश और दुख देखा गया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
1400 वर्ष पुरानी परंपरा का 80 वर्ष पुराना स्थान

हर श्री नाथ जी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक संरचना नहीं, बल्कि एक ऐसी विरासत है जिसने भारत के अलग-अलग राज्यों में लाखों सेवकों को जोड़ा हुआ है। यहां आने वाले श्रद्धालु इसे गोरखनाथ परंपरा का आध्यात्मिक केंद्र मानते हैं, जहां भक्ति, सिमरन और सेवा को धर्म का मूल मानकर जिया जाता है।

मंदिर से जुड़े सेवक बताते हैं कि 80 वर्षों पहले स्थापित यह स्थान, आधुनिक दिल्ली में परंपरा और अध्यात्म का एक अनोखा संगम रहा है, जहां रोजाना सैकड़ों लोग पूजा, भजन और सत्संग के माध्यम से मानसिक और सामाजिक शांति प्राप्त करते रहे हैं।

सबसे दुखद बात यह रही कि जिस हिस्से में रोजाना लंगर और परशाद बांटे जाते थे वह एक और स्थान जिसे तुलसी वन के नाम से जाना जाता था वही हिस्से अधिकारियों द्वारा बिना उचित संवाद और संवेदनशीलता के ध्वस्त कर दिया गए।

मंदिर प्रबंधक कमेटी के प्रधान राम नारायण मल्होत्रा ने बताया, “यहां रोजाना सैकड़ों लोगों के लिए परशाद बनता था। यह सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि सेवा, भक्ति और समुदाय की पहचान थी। इसे तोड़ने से हमारी आस्था पर चोट पहुंची है।”

ध्वस्तीकरण के दौरान बिजली और पानी की सप्लाई भी बाधित हुई, जिसके चलते मंदिर प्रांगण में जाने वाले भक्तों और साधुओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
रविवार को भजनों और कीर्तन में उमड़ा जनसागर

ध्वस्तीकरण के बाद भी श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था कम नहीं हुई। रविवार को मंदिर प्रांगण में सैकड़ों लोग एकत्र हुए और सामूहिक रूप से नाम संकीर्तन, भजन और भगवान लक्ष्मी नारायण जी के दर्शन किए। पूरे परिसर में भक्ति और शांति का वातावरण था। लोगों ने हाथ जोड़कर मंत्रोच्चार किया, भजन गाए, और मंदिर की परंपरा को जारी रखने का संकल्प लिया।

एक श्रद्धालु ने कहा, “मंदिर और उसकी परंपरा सदियों से जीवित है। हम टूटे नहीं हैं, हम और मजबूत हुए हैं।” मंदिर से जुड़े लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि परंपरा और आस्था को समझा जाए और  मंदिर की क्षतिग्रस्त संरचनाओं को वापस किया जाए।

प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि उद्देश्य विवाद या टकराव नहीं, बल्कि समाधान और संरक्षण है। रविवार को उपस्थित सैकड़ों लोगों की भीड़, ऊंची आवाज में गाए जा रहे भजन, और भगवान लक्ष्मी नारायण के दर्शन के लिए उमड़े भक्तों ने यह संदेश दिया कि मंदिर लोगों की भक्ति, सेवा और जुड़ाव से खड़ा होता है। और यही भक्ति, यही परंपरा इस मंदिर की बुनियाद है।

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