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कोडीन सीरप का ₹97 लाख का काला कारोबार, बड़े दवा कारोबारियों के सिंडिकेट ने कैसे खोली नशे की दुकान?

LHC0088 2025-12-8 19:40:28 views 505
  

प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



अनूप गुप्ता, जागरण, बरेली। नारकोटिक और कोडीन युक्त सीरप की बिक्री में कुछ दवा कारोबारियों का सिडिंकेट अभी भी काम कर रहा है। पहले कुछ कारोबारी कई कंपनियों से यह सीरप मंगवाते हैं और फिर उन्हें कमीशन देकर इस सिंडीकेट में शामिल दो-तीन बड़े कारोबारी खरीद कर इसकी बड़ी खेप चोरी-छिपे बाहर पहुंचा दी जाती है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस खेल की जड़ें इतनी गहरी हैं, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के हाथ भी वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। वर्ष 2018 में भी 19 दवा कारोबारियों का ऐसे ही सिडिंकेट को दिल्ली पुलिस की टीम ने पकड़ा था। जांच चली लेकिन एक-एक दवा कारोबारी इससे बाहर होते चले गए। हालांकि अभी भी एक कारोबारी इस केस के सिलसिले में दिल्ली दौड़ लगा रहा है।

अब कोडीन सीरप की बिक्री में बार फिर तीन बड़े दवा कारोबारियों पर जांच बैठी और एक को 97 लाख रुपये की कोडीन वाली सीरप की चोरी-छिपे बिक्री सामने आई है तो एक फिर में यह पुराना मामला भी गर्म होता दिखाई दे रहा है। मंडल में गली नवाबान और शास्त्री मार्केट में दवा के थोक कारोबारियों का गढ़ है।

इसमें कुछ व्यापारी नारकोटिक और कोडीन युक्त सीरप का कई करोड़ का अवैध कारोबार कर रहे हैं। जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने 20 नवंबर को एक्सट्रीम हेल्थ सोल्यूशन गली नवाबान सहित मैसर्स पवन फार्मास्युटिकल्स गली नवाबन और मैसर्स- पवन फार्मास्युटिकल्स, माडल टाउन फर्मों को नारकोटिक और कोडीन सीरप की अवैध बिक्री के मामले में पकड़ा था।

जांच के दौरान यह सामने आ चुका है कि एक्सट्रीम हेल्थ साल्यूशन नाम की फर्म ने गाजियाबाद की एक कंपनी से करीब 97 लाख रुपये के 62,687 कोडीन सीरप की बोतलें खरीदीं लेकिन उसकी बिक्री कहां की गई और इसका स्टाक किस जगह पर किया गया, यह अब तक पता नहीं चल रहा है। हालांकि इस प्रकरण में इस फर्म पर एफआइआर दर्ज होने के साथ उसका लाइसेंस भी निरस्त किया जा चुका है।

इसके अलावा दो अन्य फर्मों की जांच अभी चल रही है। बताते हैंं कि कोडीन सीरप की चोरी-छिपे बिक्री के लिए अभी सिंडिकेट काम कर रहा है। इसमें शामिल छोटे कारोबारी कंपनियों से अपने नाम की बिलिंग कराकर यहां के दो-तीन बड़े दवा कारोबारियों से कोडीन सीरप की खेप पहुंचा देते हैं।

इसके एवज में उन्हें इसका मोटा कमीशन मिल जाता है। वर्ष 2018 में भी नारकोटिक और कोडीन युक्त सीरप बेचने के मामले में 19 दवा कारोबारियों का एक ऐसा ही सिंडिकेट दिल्ली को द्वारिका सेक्टर-17 की पुलिस ने पकड़ा था। इसके बाद इन फंसे दवा कारोबारियों से लंबी पूछताछ भी हुई लेकिन बाद में एक-एक कर व्यापारी इस विवेचना से बाहर होते चले गए।

सूत्रों की मानें तो इस सिंडिकेट में पुलिस और दवा कारोबारियों के बीच गहरा गठजोड़ और पूरे मामले फाइलों में दबाता चल गया। हालांकि इस प्रकरण में एक कारोबारी भी भी फंसा हुआ है। अब खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में हाल में तीन दवा फर्मों के ऐसे ही प्रकरण में फंसने के बाद करीब सात साल पुराने इस मामले को लेकर फिर से सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
कई जिलों से ड्रग इंस्पेक्टरों से मांगा जा चुका रिकार्ड

नारकोटिक और कोडीनयुक्त सीरप बिक्री के प्रकरण में मैसर्स पवन फार्मास्युटिकल्स नाम की दो फर्मों की जांच भी खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम कर रही है। चूंकि इस फर्म ने बरेली के साथ रामपुर, पीलीभीत, हाथरस, मुरादाबाद, बदायूं, अलीगढ़, सहारनपुर सहित कई जिलों में भी बिक्री थी।

ऐसे में जांच कर रहे औषधि निरीक्षक राजेश कुमार ने इन सभी जिलों के सभी ड्रग इंस्पेक्टरों से यह रिकार्ड मांगा गया था कि इस फर्म की बिक्री के सभी बाउचर्स और अन्य रिकार्ड उपलब्ध करा दें, ताकि इनका सत्यापन करके यह तय किया जा सके कि संबंधी दवाओं और सीरप की बिक्री नियमानुसार की गई है या नही। जांच कर रहे औषधि निरीक्षक का कहना है कि अभी तीन-चार जिलों से बिक्री का रिकार्ड नहीं मिला है। ऐसे में पवन फार्मास्युटिकल्स को लेकर अभी यह तय नहीं हो सका है कि बिक्री अवैध रूप से की गई है या नहीं।
स्टाक रखने की लिमिट न होने से भी अवैध बिक्री के खुले रास्ते

नारकोटिक और कोडीन सीरप का इस्तेमाल नशे के लिए होने और इसकी चोरी-छिपे खेप लखनऊ, कोलकाता के जरिये बांग्लोदश पहुंचाने के केस सामने आने के बाद करीब डेढ़ साल पहले दवा विक्रेताओं के लिए भंडारण की एक सीमा तय की गई थी, लेकिन यह कुछ ही समय के लिए प्रभावी रही। बाद में इसे हटा दिया गया। इसके बाद इन दवाओं की अवैध बिक्री करने वाले कारोबारियों ने मनमाने और बेहिसाब तरीके से इसका भंडारण करने लगे। ऐसे में प्रशासन के लिए भी इन्हें पकड़ पाना कठिन हो गया।
ढाई हजार थोक कारोबारी, हर दिन दो से तीन करोड़ का कारोबार

जिले में दवा का कारोबार काफी बड़ा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दवा के करीब ढाई हजार कारोबारी है, जबकि फुटकर व थोक मिलाकर लगभग 6500 व्यापारी इस कारोबार से जुड़े हैं। इस तरह से इन दुकानदारों से जरिये हर दिन करीब दो से तीन करोड़ रुपये का कारोबार होता है। इससे साफ है कि दवा कारोबार का काफी बड़ा नेटवर्क है। चूंकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पास इनकी निगरानी और छापेमारी के लिए काफी कम स्टाफ है। ऐसे में तमाम दुकानदारों के यहां नियमित चेकिंग भी नहीं हो पा रही है।
नकली दवाओं के मामले में भी फंसी कइयों की गर्दन

कोडीन सीरप ही नहीं, नकली दवाओं के मामले में भी कई दवा कारोबारियों की गर्दन फंसी हुई है। इसके तार आगरा की फर्म से जुड़़े बताए जा रहे हैं। हालांकि इसकी जांच जारी है। इसमें दवा कारोबारी का लाइसेंस भी 30 दिनों तक लिए निलंबित चल रहा है। खास बात यह है कि इस कारोबारी की जो दवाएं पकड़ी गईं हैं, वे लैब में मानक के अनुरूप मिली हैं लेकिन अधिकारियों का कहना है कि व्यापारी ने जिस कंपनी से दवा खरीदना बताया है कि उसका कहना है कि वह यह दवा बनाती ही नहीं है। इसमें विभागीय कार्रवाई होनी अभी बाकी है।

  


अगर कोई व्यापारी अवैध तरीके से दवा की बिक्री करता हुआ पकड़ा जाता है तो एसोसिएशन किसी भी दशा में उसका साथ नहीं देगी। इसलिए सभी दवा विक्रेताओं से आग्रह है कि वह नियमानुसार ही दवाओं की बिक्री करे और उसके सभी बिल-बाउचर्स भी सुरक्षित रखें।

- रितेश मोहन गुप्ता, सचिव, डिस्ट्रिक बरेली कैमिस्ट एसोसिएशन (डीबीसीए)


  

  


नारकोटिक और कोडीन वाले सीरप की बिक्री के मामले में जांच चल रही है। इसमें कई मामलों में तह तक जाने का प्रयास किया जा रहा है। जो भी पुराने मामलेे हैं, उनका भी संज्ञान लेने के बाद कार्रवाई की जाएगी अवैध तौर से बिक्री करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।

- संदीप कुमार, सहायक आयुक्त (औषधि)
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