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नवादा में खाद की हो रही कालाबाजारी, 1350 की जगह 1650 रुपये में डीएपी खरीद रहे किसान

LHC0088 2025-11-27 02:07:31 views 762
  



संवाद सहयोगी, वारिसलीगंज। वारिसलीगंज के किसानों की गाढ़ी कमाई को सहजता से उर्वरक विक्रेता मुनाफाखोरी कर रहे हैं। 1350 रुपये प्रति बैग वाला डीएपी को किसान 1650 से 1700 रुपये में खरीदकर अपने खेतो में डाल रहे हैं।

कमरतोड़ मंहगाई में किसानों को खेती करना घाटे का कार्य साबित हो रहा है। परेशान किसान अपनी धान के उत्तम कोटि की फसल को औने-पौने कीमत पर बिक्री करने को मजबूर हैं।

शनिवार को वारिसलीगंज बाजार में उर्वरक विक्री की पड़ताल के दौरान कुछ दुकानदारों ने कहा कि थोक विक्रेता द्वारा ही उर्वरक महंगा दिया जाता है, साथ ही दवा बिक्री करने की बाध्यता होती है।

बाजार के दुकानदार शिव रतन प्रसाद, महेंद्र प्रसाद, युगल प्रसाद समेत अन्य उर्वरक बिक्रेता कहते हैं कि मंहगा खरीद के बाद सस्ता बिक्री संभव नहीं है। दूसरी ओर, विस्कोमान को इतना कम डीएपी उपलब्ध करवाया जाता है जो ऊंट के मुंह मे जीरा वाली कहावत को चरितार्थ करती है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

बाजार में यूरिया के 45 केजी का बैग 350 से 360 रुपये में मिलता है, जबकि पारस डीएपी जिसमें रसायन की मात्रा 12:32:16 रहती है। उसकी बाजार मूल्य 1950 रुपये से दो हजार रुपये तक है, जबकि अन्य कंपनियों का डीएपी जिसमें रसायन की मात्रा कम होती है उसे थोड़ी कम कीमत पर मिलती है।

कोई भी डीएपी सरकार विस्कोमान काफी कम भेजती है। 20:20:13 मात्रा का का डीएपी की बाजार मुख्य 1550, यूरिया की बाजार कीमत 266 की जगह 350 रुपये प्रति बैग हो जाती है। जबकि अन्य कंपनियों के डीएपी की कीमत आसमान छूती है।

मकनपुर के किसान उपेंद्र सिंह, कुंदन सिंह, बिक्की कुमार, देवन महतो, लीला बीघा के किसान गंगा यादव, चैनपुरा के अभिमन्यु सिंह, सुबोध सिंह आदि कहते हैं कि जब भी किसानों को उर्वरक की आवश्यकता होती है। उर्वरक मुनाफाखोरी का शिकार होता है। जो किसानों की जेबें ढीली करती है।
अधिकारियों का तर्क- किसान लिखित शिकायत करें तो होगी कार्रवाई

कृषि विभाग के अधिकारियों का तर्क होता है कि यदि किसान लिखित शिकायत करेंगे तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। इस बीच किसान किसी तरह से महंगी खाद खरीदकर खेती करते हैं। वह लिखित शिकायत के झंझट में पड़ना नहीं चाहते हैं।

लिहाजा, मनमानी कीमत लेने वाले खाद दुकानदारों पर कार्रवाई नहीं हो पाती। जरूरत है औचक निरीक्षण कर सख्त कार्रवाई करने की। रबी सीजन में डीएपी की अधिक मांग रहती है। ऐसे में दुकानदार मुनाफाखोरी करते हैं।
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