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शाहजहांपुर: मृतक किसान को 1 लाख की खाद! फर्जीवाड़ा उजागर होने पर जिस सचिव ने लोन दिया, उसी को जांच

deltin33 2025-11-27 01:56:08 views 1042
  

प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



संवाद सूत्र, जागरण, सिंधौली। किसानों को खाद की एक-एक बोरी के लिए कई-कई दिन परेशान होना पड़ रहा है, लेकिन समितियों पर मरे हुए लोगों भी घर बैठे इसका आवंटन हो रहा है। ऐसा ही कारनामा पुवायां गन्ना सहकारी समिति पर हुआ, जहां फर्जीवाड़ा करते हुए स्वर्ग सिधार चुकीं महिला काश्तकार नीलम देवी को एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कर दिया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इसकी एवज में इतने ही मूल्य की खाद भी जारी कर दी गई। जिला मुख्यालय तक के अधिकारी आंख मूंदकर बैठे रहे। शिकायत डीएम से हुई तो खलबली मची। मामला रफा दफा करने के लिए जांच उसी सचिव दी गई, जिसने ऋण स्वीकृत किया था। अब अधिकारी प्रकरण संज्ञान में न होने की बात कहकर प्रक्रिया में शामििल सभी कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।

पुवायां के गांव पुरैना स्थित दो एकड़ कृषि भूमि की मालिक नीलम देवी का निधन वर्ष 2023 में हो गया था। जून 2023 में उनके पुत्र राजेश व राकेश के नाम वरासत दर्ज हो गई, लेकिन वर्ष अगस्त 2024 में गन्ना सहकारी समिति पुवायां के सचिव ने नीलम के नाम पर एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत करते हुए खाद दे दी।

सिंधौली निवासी अजय कुमार ने गत सप्ताह संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम से शिकायत की, जिस पर जांच के निर्देश दिए गए, लेकिन इतने गंभीर प्रकरण में ऋण जारी करने वाले सचिव को ही जांच सौंप दी गई। स्वयं को फंसता देख मामले में लीपापोती करने के लिए सचिव ने आनन-फानन में जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी।

इसमें उसने मृतक नीलम देवी के भाई व भतीजों पर तथ्य छिपाकर ऋण स्वीकृत करा लेने का आरोप लगा दिया। सचिव ने रिपोर्ट में यह भी बताया कि एक लाख की खाद जो ऋण स्वरुप दी गयी थी। उसकी वसूली कर ली है, लेकिन अपनी रिपोर्ट में यह नहीं बताया कि ऋण स्वीकृत करने के दौरान नीलम देवी के चेक पर साइन कैसे हुए?

नीलम का एल्बम जिसमें फोटो, काश्तकार व दो गवाहों के मौके पर आने सामने साइन कराए जाते हैं वह किसने भरा और नीलम के हस्तारक्षर किसने किए? जो खाद जारी की गई वह किसको रिसीव करायी गयी? समिति के अध्यक्ष महेंद्र पाल से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अनभिज्ञता जतायी। कहा कि मृतक के नाम पर ऋण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि काश्तकार को प्रक्रिया पूरी करने के लिए स्वयं मौके पर आना होता है। अगर समिति में किसी ने गड़बड़ी की है तो डीएम से मिलकर उसके विरुद्ध कार्रवाई भी कराएंगे।

ऋण के लिए यह हैं नियम

गन्ना सहकारी समिति से ऋण लेने के लिए काश्तकार की समिति क्षेत्र में कृषि भूमि होनी चाहिए। वह गन्ने का उत्पादन करता हो। किसी भी बैंक या समिति में बकायेदार न हो, उस क्षेत्र की संबंधित चीनी मिल में उसके नाम से गन्ना सट्टा क्रियाशील हो।

समिति पर यह है ऋण की प्रक्रिया

किसान को क्षेत्रीय गन्ना ग्राम सेवक को ऋण के लिए आवेदन पत्र देता है। जिसके बाद समिति सचिव विधिवत जांच करने के बाद राजस्व में दर्ज भूमि के अनुसार ऋण की सीमा तय करता है। इसके बाद समिति पर काश्तकार का फोटो एल्बम कार्ड तीन प्रतियों में तैयार किया जाता है, जिस पर क्रमशः क्षेत्रीय गन्ना ग्राम सेवक, गन्ना पर्यवेक्षक तथा सबसे बाद में समिति सचिव हस्ताक्षर कर ऋण स्वीकृत करता है।

एल्बम में भूमि के दस्तावेज संलग्न होने के साथ गवाहों के हस्ताक्षर भी कराए जाते हैं। एल्बम कार्ड प्रकिया पूरी होने के बाद समिति सचिव लाभार्थी काश्तकार को जिला सहकारी बैंक द्वारा प्रदत्त अंश ख की चेक बुक जारी कर देता है। फिर काश्तकार जितने रुपये की खाद या बीज लेना चाहता है उतनी रकम चेक के एक पृष्ठ पर भरकर सचिव को सौंपता है।

सचिव इंडेन्ट फार्म भरकर उतनी धनराशि की सामग्री काश्तकार को दे देता है। समिति ऋणराशि के बदले खाद या दवा ही देती हैं। चेक लेकर सचिव उसे जिला सहकारी बैंक भेज देता है, जिसके बाद बैंक से अंकित धनराशि को समिति के खाते में भेज दिया जाता है।


यह प्रकरण प्रकरण हमारी जानकारी में नहीं है। हम इसकी जानकारी करके जिला गन्नाधिकारी काे सूचित करेंगे।इस गड़बड़ी में जो लोग भी शामिल रहे हैं, उन पर कार्रवाई कराएंगे।

महेंद्र पाल, अध्यक्ष पुवायां गन्ना सहकारी समिति





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