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विदेशी नागरिकों द्वारा फर्जी जमानती देने की बढ़ती घटनाओं पर SC चिंतित, वेरिफिकेशन की राष्ट्रीय प्रणाली बनाने की मांग

Chikheang 2025-11-21 04:37:19 views 1107
  

फर्जी जमानती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंतित।



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी नागरिकों के सदिग्ध तौर पर जमानत लेने और फिर गायब होने के बढ़ते पैटर्न पर चिंता जताई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (UIDAI) से पूछा है कि जमानत के दस्तावेजों की असलियत को वेरिफाई करने के लिए अभी कौन से सिस्टम मौजूद हैं? विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

कोर्ट के सामने रखे गए डेटा के मुताबिक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा जांचे गए कम से कम 38 मामले और डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस द्वारा जांचे गए नौ मामलों में विदेशी नागरिक (जो खासकर नाइजीरिया और नेपाल के थे) जमानत देने के बाद भाग गए थे वो बाद में नकली निकले।
फर्जी जमानती मामले में सुप्रीम कोर्ट चिंतित

जस्टिस संजय करोल और विपुल एम पंचोली की बेंच ने देखा कि कुछ राज्यों में जमानतों द्वारा नकली पहचान बनाने की घटना बढ़ रही है। जजों ने जोर देकर कहा कि इस मुद्दे का क्रिमिनल जस्टिस प्रोसेस पर गंभीर असर पड़ सकता है।

उन्होंने इस बात की असेसमेंट करने की मांग की कि क्या मौजूदा टेक्नोलॉजिकल टूल्स, जैसे कि नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर द्वारा डेवलप किया गया जमानत वेरिफिकेशन मॉड्यूल काम कर रहे हैं और काफी हैं।

यह मामला DRI के एक केस से जुड़ा है जिसमें 4.9 kg हेरोइन ज़ब्त की गई थी। आरोपियों में से एक, चिडीबेरे किंग्सले नौचारा को मई में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस आधार पर जमानत दे दी थी कि वह दो साल से ज्यादा समय से कस्टडी में था।
विदेशी नागरिक जमानत लेकर गायब

जब सरकार ने इस ऑर्डर को चैलेंज किया, तो सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रोक लगा दी और महाराष्ट्र पुलिस को आरोपी को अरेस्ट करने और जरूरत पड़ने पर लुकआउट सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया।

हालांकि, अक्टूबर तक नौचारा गायब हो गया था। लुकआउट नोटिस और फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस की कोशिशों के बावजूद उसका पता नहीं चला। इसके बाद कोर्ट ने अधिकारियों से उस जमानतदार से कॉन्टैक्ट करने को कहा जिसने उसकी जमानत की गारंटी दी थी।

DRI के बाद के एफिडेविट से पता चला कि जमानतदार द्वारा दी गई हर डिटेल झूठी थी। अधिकारियों को पता चला कि ज़मानतदार दिए गए परेल पते पर नहीं रहता था; वहां के लोगों ने उसके बारे में कभी नहीं सुना था। लिस्टेड एम्प्लॉयर ने कन्फर्म किया कि ऐसा कोई व्यक्ति वहां कभी काम नहीं करता था। यहां तक कि बताया गया बैंक अकाउंट भी मौजूद नहीं था।
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