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वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक दवाएं प्रभावी नहीं: फिर लोग कर रहे सेवन, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

deltin33 6 hour(s) ago views 562
  

दैनिक जागरण के दूारा आयोजित एएमआर पर प्रहार एंटीबायोटिक्स लापरवाही कार्यक्रम में उपस्थित डा शुभांकर एवं स्कूल के प्राचार्य,शिक्षक व बच्चे । जागरण



जागरण संवाददाता, भागलपुर। डाक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक का उपयोग या दवा का कोर्स पूरा नहीं करने से शरीर में मौजूद बैक्टीरिया दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। यह स्थिति आगे चलकर एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस का कारण बन जाती है, जिससे सामान्य संक्रमण का इलाज भी कठिन हो जाता है।

यह जानकारी गुरुवार को हैप्पी वैली स्कूल में दैनिक जागरण और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा आयोजित एंटीबायोटिक दवा के खिलाफ जागरूकता अभियान के दौरान दंत रोग विशेषज्ञ डा. सुभांकर कुमार सिंह ने साझा की।

डॉ. सुभांकर ने बताया कि एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के इलाज में अत्यंत उपयोगी होती हैं, लेकिन इनका अनावश्यक और बिना चिकित्सकीय सलाह के उपयोग आज विश्वभर में गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। दंत चिकित्सा में, दांत दर्द, मसूड़ों की सूजन या अन्य समस्याओं के लिए कई लोग स्वयं एंटीबायोटिक खरीदकर सेवन कर लेते हैं।

  

हालांकि, कुछ समय के लिए दर्द से राहत मिल सकती है, लेकिन संक्रमण पूरी तरह समाप्त नहीं होता और बाद में यह अधिक गंभीर रूप ले सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर बुखार, सर्दी-खांसी या दर्द में एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती। वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक दवाएं प्रभावी नहीं होतीं, फिर भी लोग बिना जानकारी के इनका उपयोग करते हैं, जो भविष्य में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने एंटीबायोटिक दवाओं के दुष्प्रभाव, दवा लेने का सही समय, दंत रोगों से बचाव और प्रतिरोध से बचने के उपायों पर कई प्रश्न पूछे। चिकित्सक ने बताया कि संतुलित आहार, नियमित स्वच्छता, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने से संक्रमण की संभावना कम होती है और अनावश्यक दवाओं के उपयोग से भी बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं में सही जानकारी का प्रसार होने से समाज में जागरूकता तेजी से बढ़ती है, क्योंकि वे अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी सही संदेश पहुंचाते हैं।

  

दैनिक जागरण द्वारा एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए यह जागरूकता अभियान शहर के विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों और संस्थानों में लगातार चलाया जा रहा है। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य विवेक चटर्जी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी वैज्ञानिक और सही जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है।

इस तरह के कार्यक्रम न केवल छात्रों के ज्ञान को बढ़ाते हैं, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम के अंत में छात्र-छात्राओं ने एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग केवल डाक्टर की सलाह से करने, दवा का पूरा कोर्स पूरा करने और अपने परिवार एवं आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।
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