LHC0088 • 2 hour(s) ago • views 710
प्रतीकात्मक तस्वीर
अश्वनी त्रिपाठी, जागरण देहरादून। ऑनलाइन जालसाजी करने वाले ठगों की तलाश में पहली बार उत्तराखंड साइबर पुलिस चीन में बैठे गैंग के सरगना की जड़ तक पहुंच गई है। पुलिस निवेशक बनकर ऑनलाइन ठगी के लिए संचालित व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल हुई तो परतें खुलती चली गईं।
पुलिस ने ठगी का पूरा नेटवर्क खंगालते हुए उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों के लिए सिरदर्द बने इस गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरोह का सरगना चीन में बैठकर ही साइबर फ्रॉड का गिरोह चला रहा है।
पुलिस के मुताबिक, व्हाट्सएप ग्रुप में चीन में बैठे सरगना ने भारत में अपने गुर्गों के अलावा स्थानीय लोग भी शामिल किए हैं। ग्रुप में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं, जो निवेश के लिए उकसाने का काम करते हैं। पुलिस ने खुद निवेशक बनकर ग्रुप में एंट्री ली। टीम ने चैट, कॉल रिकॉर्ड, ट्रांजेक्शन पैटर्न और डिजिटल आईपी लाग्स की बारीकी से निगरानी की।
कई दिनों की पड़ताल के बाद भारत में सक्रिय दो अहम एजेंटों की पहचान हुई। एएसपी (साइबर) कुश मिश्रा ने बताया कि चीन में बैठे सरगना के दो गुर्गे देहरादून में ऑनलाइन ठगी गैंग के विस्तार के लिए पहुंचे थे, इन्हें पकड़ने में सफलता मिली है। इसी तरह ब्रो-पे, एचएनएनपे, एचवाइवाईपे जैसे कई बड़े कंपनी पैनल हैं, जो साइबर अपराध से अर्जित रकम खपाने और घुमाने का काम कर रहे हैं। यह नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से काम करता है। ग्रुप में कुछ दिन तक नए सदस्य को छोटे फायदे दिखाए जाते हैं, फिर असली खेल शुरू होता है। लिमिटेड ऑफर, सिर्फ आज का मौका, वीआईपी इन्वेस्टमेंट स्लॉट जैसे मैसेज भेजकर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जाता है।
स्थानीय एजेंट आसपास के शहरों और कस्बों में बैठकर खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताते हैं और बड़ी रकम निवेश कराने के लिए उकसाते हैं। ऑपरेशन के दौरान पुलिस को पता चला कि निवेश के नाम पर ली गई रकम सीधे किसी एक खाते में नहीं जाती है।
पहले उसे म्यूल अकाउंट यानी किराए पर लिए गए बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता है। फिर कई चक्र में घुमाकर रकम को अलग-अलग खातों और डिजिटल वालेट में भेजा जाता है, ताकि जांच एजेंसियों के लिए ट्रांजेक्शन की कड़ी को जोड़ना मुश्किल हो। |
|