सोनभद्र। खनन हादसे जैसे संवेदनशील मामले पर अमर उजाला ने जल्दबाज़ी में ऐसी खबर प्रकाशित कर दी, जिसने न सिर्फ़ जिले को ग़लत दिशा में ढकेला बल्कि प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की।
रिपोर्टर की “तेजी” ने संस्थान को भी गुमराह किया—और अखबार में वही छपा, जो जाँच से बिल्कुल उलट निकला। लेकिन इस बार पुलिस और जिला प्रशासन ने भी चुप्पी नहीं साधी। सोनभद्र पुलिस ने सोशल मीडिया पर साफ-साफ लिखा:
“प्रकाशित समाचार भ्रामक और पूरी तरह असत्य है। तथ्यहीन पोस्ट से समाज में भ्रम, तनाव और कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे भ्रामक समाचार न प्रकाशित करें।” इतना ही नहीं—पुलिस ने घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी सार्वजनिक कर दिए, जिसमें साफ कहा गया कि अखबार में छपी कहानी का असल घटनाक्रम से कोई लेना-देना नहीं है।


डीएम कार्यालय ने भी इस खबर को तथ्यहीन बताते हुए खंडन जारी किया। यानि दो-दो जिम्मेदार संस्थानों ने आधिकारिक रूप से साफ कर दिया कि अमर उजाला की खबर वास्तविकता से कोसों दूर थी।
अब बड़ा सवाल यह है कि—
पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि—
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