दिल्ली पुलिस की एक तस्वीर इस वक्त इंटरनेट पर सुर्खियां बटोर रही है। खास बात ये है कि यह तस्वीर एनडीटीवी ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करने के बाद हटा ली है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में कुछ लोग प्रदूषण को लेकर आवाज उठा रहे थे। यह बात दिल्ली पुलिस को नागवार गुजरी और तमाम आवाजें जो सरकार के खिलाफ उठ रही थीं, पुलिस ने अपने बूटों तले रौंद दिया… लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो ये उठ रहा है कि एनडीटीवी ने आखिर किसके दबाव में आकर ट्वीट हटा लिया…?
रौनक खत्री-
इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर आत्मा तक काँप उठी है… लगता है सरकार ने पूर्ण तानाशाही का वस्त्र धारण कर लिया है और पुलिस-प्रशासन को जनता पर अत्याचार करने का औजार बना दिया है।
नागरिक जब केवल साफ हवा मे साँस लेने का अधिकार माँगते हैं और बदले में उन्हें इस प्रकार सड़क पर पटककर कुचला जाता है, तो यह किसी लोकतांत्रिक राष्ट्र की नहीं, बल्कि निरंकुश सत्ता की पहचान होती है।
मनीष तिवारी-


NDTV ट्वीट करता है, फिर सत्ता के गलियारों से एक कॉल आती है…और सच अचानक डिलीट हो जाता है।
यही है आज के दौर की “मैनेज्ड जर्नलिज़्म” ?
मनीष शर्मा-
कभी-कभी तस्वीरें शब्दों से ज़्यादा चुभती हैं, यह आदमी कोई अपराधी नहीं था। उसने बस इतना कहा था कि “साफ हवा चाहिए, जीने का हक चाहिए।” और देखिए उसके साथ कैसा बर्ताव हो रहा है।
दिल सच में भारी हो जाता है यह सोचकर कि हमारे ही देश में, हमारे ही लोग, सिर्फ सवाल पूछने पर इस तरह तोड़े जाते हैं।
ये राजनीति नहीं है… ये इंसानियत का सवाल है। RSS BJP को उनके खिलाफ उठती आवाज़ें कभी पसंद नहीं आती, इसलिए उन्हें कुचला जाता है।
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