व्हाइट कॉलर जॉब। (फाइल)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। व्हाइट कॉलर जॉब में मंदी और एआई के दौर में छटनी से परेशान कर्मचारी अब ब्लू कॉलर जॉब की ओर बढ़ने लगे हैं। एक तरफ, कर्मचारियों को अब व्हाइट कॉलर जॉब में अनिश्चिता महसूस हो रही है, तो वहीं दूसरी तरफ, व्लू कॉलर इंडस्ट्रीज में कामगारों की भारी कमी है। ऐसे में यहां तेजी से तरक्की के मौके भी हैं। साथ ही इन क्षेत्रों में एआई का भी असर कम है।
ब्लू कॉलर जॉब की बात करें तो इनमें व्हाइट कॉलर जॉब के मुकाबले वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर माना जाता है। इनमें काम आमतौर पर ऑफिस की डेस्क पर बैठकर नहीं बल्कि फील्ड, फैक्ट्री, वर्कशॉप या कंस्ट्रक्शन साइट पर किया जाता है। इनमें इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, कारपेंटर, ऑटो मैकेनिक, क्रेन ऑपरेटर जैसे काम शामिल हैं।
ब्लू कॉलर जॉब की ओर रुख कर रहे जेन-जी
जेन-जी भी अब डेस्क जॉब और एआई से प्रभावित ऑफिस की नौकरियों से बचना चाहते हैं। इसलिए वे ब्लू कॉलर करियर को गंभीरता से ले रहे हैं। हालांकि, जो ब्लू कॉलर करियर इसलिए अपनाते क्योंकि वे अपनी डिग्री और अनुभव में किए गए निवेश के छोड़ना नहीं चाहते।
बड़ी बात यह भी है कि करियर बदलना आसान भी नहीं होता है, फिर भी लंबे समय के फायदे के लिए प्रतिष्ठा और लेबल को आड़े नहीं आने देना चाहिए। |