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ठंड में कार स्टार्ट करने का सही तरीका।
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। ठंड के मौसम में सुबह के समय गाड़ी स्टार्ट करने में कई लोगों को समस्या का सामना करना पड़ता है। हम यहां पर आपको इसी समस्या के समाधान के बारे में बता रहे हैं, जो है इंजन वार्म-अप करना। गाड़ियों के लिए इंजन वार्म-अप उतना ही जरूरी है, जितना कई लोगों के लिए सुबह की चाय-कॉफी। अब सवाल यह उठता है कि क्या आज के समय में कार को सच में लंबे समय तक गर्म करने की जरूरत है? या फिर यह पुरानी सोच का हिस्सा बन चुका एक मिथक है? हम यहां पर आपको इंजन वार्म-अप से जुड़े बड़े मिथकों को तोड़ेंगे और ठंड में कार स्टार्ट करने का सही तरीकों के बारे में बता रहे हैं।
इंजन वार्म-अप की सोच कहां से आई?
कार को चलाने से पहले गर्म करने की परंपरा कार्बोरेटर इंजन वाले दौर से आई थी, जो ज्यादातर 1990 के पहले की गाड़ियों में होते थे। उस समय ठंड में इंजन स्टार्ट करने पर फ्यूल और हवा का सही संतुलन बनने में समय लगता था। अगर इंजन तुरंत चलाया जाता, तो कार रुक सकती थी या ठीक से चल नहीं पाती। इसलिए लोग गाड़ी को कुछ देर स्टार्ट करके छोड़ देते थे, ताकि इंजन ऑप्टिमम तापमान तक पहुंच जाए और स्मूथ चले। लेकिन आज अधिकांश कारों में फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम होता है, जो बाहरी तापमान चाहे जैसा हो, फ्यूल-हवा के कॉम्बिनेशन को खुद एडजस्ट कर देता है। यहीं से यह सवाल उठता है कि लंबे वार्म-अप की जरूरत अब भी है या नहीं।
आधुनिक इंजन ठंड में कैसे काम करते हैं?
आज के इंजन सेंसर और कंप्यूटर कंट्रोल सिस्टम के साथ आते हैं। यही वजह है कि वे अलग-अलग तापमान में भी बेहतर तरीके से काम कर लेते हैं। कार स्टार्ट होते ही फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम तुरंत सही मात्रा में फ्यूल सप्लाई करने लगता है। इंजन कुछ ही क्षणों में चलने के लिए तैयार हो जाता है। कई आधुनिक कारें खड़ी रहने की बजाय चलते-चलते जल्दी गर्म होती हैं।
ठंड में इंजन ऑयल थोड़ा गाढ़ा हो सकता है, जिससे इंजन के अंदर रेजिस्टेंस बढ़ता है। आजकल के मॉडर्न ऑयल, खासकर सिंथेटिक ब्लेंड कम तापमान में भी बेहतर तरीके से फ्लो करते हैं। इसकी वजह से कार स्टार्ट करते ही इंजन को जरूरी लुब्रिकेशन मिलने लगता है।
इंजन वार्म-अप को लेकर मिथक
मिथक: इंजन वार्म-अप करने से माइलेज बेहतर होता है।
यह सबसे आम गलतफहमी है कि गाड़ी को कुछ मिनट आइडल छोड़ने से इंजन गर्म होगा और फ्यूल बचेगा। हकीकत यह है कि आइडलिंग के दौरान इंजन बिना किसी काम के फ्यूल खर्च करता रहता है। यानि इंजन चल रहा है, पेट्रोल/डीजल जल रहा है, लेकिन कार आगे बढ़ ही नहीं रही।
लंबी आइडलिंग कई बार धीरे-धीरे चलाने की तुलना में ज्यादा फ्यूल बर्बाद कर देती है, क्योंकि इंजन उतना जल्दी गर्म भी नहीं होता जितना मूवमेंट में होता है। सही तरीका यह है कि ठंड ज्यादा हो तो कार स्टार्ट करके 30 सेकंड से 1 मिनट तक आइडल रहने दें और फिर धीरे-धीरे चलाना शुरू करें।
फैक्ट: ज्यादा आइडलिंग से इंजन पर असर पड़ सकता है।
ठंडे इंजन में फ्यूल कम्बशन उतना प्रभावी नहीं होता जितना गर्म होने पर। इसके कारण कुछ फ्यूल के अवशेष सिलेंडर वॉल पर जमा हो सकते हैं, जो लंबे समय में इंजन के घिसने की वजह बन सकते हैं। यही कारण है कि सिर्फ खड़ा करके इंजन गर्म करना हमेशा फायदे का सौदा नहीं है।
जब आप धीरे-धीरे गाड़ी चलाते हैं, तो इंजन जल्दी ऑप्टिमम तापमान तक पहुंचता है। ऑयल सर्कुलेशन बेहतर होता है। इंजन को जरूरी लुब्रिकेशन समय पर मिलता है।
मिथक: ठंडी कार चलाना नुकसानदायक है।
कई लोगों को लगता है कि अगर कार को पूरा गर्म किए बिना चला दिया तो इंजन खराब हो सकता है। इसकी हकीकत यह है कि आज की कारें कारें ठंड में चलाने के लिए पर्याप्त मजबूत बनाई जाती हैं। इसके बावजूद आपको स्टार्ट के बाद शुरुआत में कुछ मिनट मॉडरेट स्पीड रखें। इंजन गर्म होने तक तेज एक्सेलेरेशन और हाई RPM से बचें।
ठंड में इंजन ऑयल की भूमिका क्यों जरूरी है?
इंजन ऑयल का काम होता है। मूविंग पार्ट्स को लुब्रिकेट करना होता है। घर्षण कम करना है। साथ ही इंजन को सुरक्षित रखना है। ठंड में पारंपरिक ऑयल गाढ़ा हो सकता है, जिससे इंजन की स्मूदनेस प्रभावित हो सकती है। सिंथेटिक ऑयल ठंड में बेहतर फ्लो करता है और शुरुआत से ही इंजन को लुब्रिकेशन देता है। इसीलिए बहुत ज्यादा देर तक आइडलिंग करके ऑयल फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती। अगर कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा ठंडे इलाके में रहता है, तो वह कोल्ड-वेदर स्पेसिफिक सिंथेटिक ब्लेंड चुन सकता है, ताकि इंजन का परफॉर्मेंस बेहतर रहे और लंबे समय का नुकसान कम हो।
लंबी आइडलिंग का पर्यावरण पर प्रभाव
यह सिर्फ इंजन या माइलेज का मुद्दा नहीं है। ठंड में इंजन जब आइडल होता है तो वह अधिक उत्सर्जन पैदा करता है, क्योंकि उस समय इंजन की कार्यक्षमता कम होती है। इसका मतलब यह भी है कि लंबी आइडलिंग से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है। इसी वजह से कई राज्यों और शहरों में आइडलिंग के खिलाफ नियम भी बनाए गए हैं, ताकि प्रदूषण कम किया जा सके।
इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के मामले में क्या होता है?
EV में इंजन वार्म-अप वाली समस्या नहीं होती, क्योंकि उनमें फ्यूल कम्बशन होता ही नहीं। ठंड में EV की बैटरी पर असर पड़ सकता है और रेंज कम हो सकती है। कई EV में बैटरी का तापमान मैनेज करने के लिए थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम होता है। कुछ मॉडल कैबिन प्री-कंडीशनिंग भी देते हैं, जिससे ठंड में आराम मिलता है और ऊर्जा की बर्बादी कम होती है।
ठंडी सुबह में कार स्टार्ट करने का सबसे सही तरीका
अगर आप सर्दियों में अपनी कार को सुरक्षित और स्मार्ट तरीके से चलाना चाहते हैं, तो इनपुट के अनुसार सबसे अच्छा तरीका यही है। सबसे पहले कार स्टार्ट करें। 30 सेकंड से 1 मिनट तक आइडल रहने दें। फिर धीरे-धीरे ड्राइव करें। शुरुआती कुछ मिनट हाई RPM और तेज एक्सेलेरेशन से बचें। अच्छी क्वालिटी का सिंथेटिक ऑयल इस्तेमाल करें और मेंटेनेंस शेड्यूल फॉलो करें। लंबे वार्म-अप से मन को थोड़ी संतुष्टि जरूर मिल सकती है, लेकिन वैज्ञानिक और प्रैक्टिकल तौर पर यह ज्यादातर मामलों में जरूरी नहीं है।
हमारी राय
ठंड में गाड़ी को 10-15 मिनट तक स्टार्ट करके खड़ा रखना जरूरी नहीं है। आज की कारें इतनी स्मार्ट हैं कि कुछ ही सेकंड में चलने के लिए तैयार हो जाती हैं। बस आप कार स्टार्ट करके 30 सेकंड से 1 मिनट तक रुकिए और फिर धीरे-धीरे चलाइए। इससे इंजन जल्दी सही तापमान पर आएगा, फ्यूल भी बचेगा और कार पर अनावश्यक दबाव भी नहीं पड़ेगा। |
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