शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाना दुष्कर्म का अपराध नहीं लेकिन दंडनीय: हाई कोर्ट
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 में यह नया प्रविधान है, जिसमें धोखाधड़ी के माध्यम से विवाह का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाना “दुष्कर्म“ का अपराध नहीं माना जाता, लेकिन इसे दंडनीय बनाया गया है।
कानून लागू होने से पहले अदालतें पक्षों के आचरण की व्याख्या धारा 375 आईपीसी (दुष्कर्म) और धारा 90 आईपीसी (भय या भ्रांति के तहत दी गई सहमति) के अनुसार करती थीं। धारा 69 बीएनएस के तहत धोखाधड़ी के साधनों की व्याख्या में नौकरी या पदोन्नति का झूठा वादा, प्रलोभन या पहचान को छिपाकर विवाह करना भी शामिल है।
यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति अवनीश कुमार सक्सेना की एकलपीठ ने दुष्कर्म के अभियुक्त अमरजीत पाल व अन्य की याचिका खारिज कर दी है। प्रकरण थाना बरवापट्टी कुशीनगर में दर्ज है। अभियुक्त व उसकी मां ने सत्र न्यायालय में चल रहे मुकदमे को रद करने के लिए याचिका दायर की थी।
अभियुक्त की तरफ से पीड़िता की उम्र 20 साल बताई गई, लेकिन पीड़िता ने अपने बयान में खुद को 18 साल से कम बताया है। अभियुक्त की तरफ से कहा गया कि पीड़िता ने धारा 175 (तीन) बीएनएस के तहत शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया फिर उसी मामले में प्राथमिकी लिखाई गई। इतना ही नहीं, उसने मेडिकल जांच कराने से इनकार कर दिया था। |