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Basti News: ईंट-भट्ठों के संचालन में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियम दरकिनार, 98 अवैध ढंग से हो रहे संचालित

cy520520 2025-11-26 18:37:25 views 901
  



ब्रजेश पांडेय, बस्ती। ईंट-भट्ठों के संचालन में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियम दरकिनार हैं।हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद भी जिले में 98 भट्ठे अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं, इन्हें बंद कराने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या फिर जिला प्रशासन की तरफ से कभी सख्ती नहीं दिखाई गई। सिर्फ नोटिस पर नोटिस दिए जाते हैं। एक भी भट्ठे बंद नहीं कराए जा सके। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

ईंट-भट्टों के संचालन में खनन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला पंचायत का अहम रोल होता है। शासन स्तर से जो गाइड लाइन बनती है, उसका पालन यह तीनों विभाग मिलकर कराते हैं। जिला पंचायत अपना कर वसूल करता है, जबकि खनन विभाग विनियमन शुल्क जमा कराता है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यह देखता है कि कोई ऐसा तो भट्ठा संचालित नहीं हो रहा, जो नियम के विपरीत है। इसके लिए एनओसी यानी सहमति पत्र अनिवार्य होता है। नियमों में भट्ठों के लिए निर्धारित स्थान की दूरी, चिमनी की ऊंचाई और ईंधन के प्रकार का सख्ती से पालन करना शामिल है।

चिमनी की ऊंचाई, उत्सर्जन आदि के मानक भी तय हैं। भट्ठों के चारों ओर 10 मीटर चौड़ी हरित पट्टी या जहां जगह नहीं है, वहां तीन मीटर ऊंची दीवार बनाने के नियम हैं। भट्ठों के लिए न्यूनतम दो एकड़ का क्षेत्रफल जरूरी है। इन नियमों का पालन न करने वाले ईंट-भट्ठों को अवैध करार दिया गया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी प्राप्त करने वाले को ही भट्ठा संचालन की अनुमति दी गई है।

विभागीय आंकड़े बताते हैं कि जिले में 235 ईंट-भट्ठे पंजीकृत हैं, जिनमें अब तक 137 भट्टा संचालकों ने एनओसी प्राप्त किया है, जबकि 98 को नोटिस दी गई है। सिर्फ 80 ऐसे भट्टे हैं, जिन्होंने विनियमन शुल्क जमा किया गया है। अन्य को चेतावनी दी गई है। जो शुल्क नहीं जमा करेंगे, उन्हें दिसंबर माह में 18 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज भी देने होंगे।

हाई कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लाइसेंस के बगैर चलने वाले ईंट-भट्ठों पर सख्ती दिखाई थी। बीते मई में अपर मुख्य सचिव मनोज सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर बिना लाइसेंस चलने वाले ईंट-भट्ठों को चिह्नित कर बंद कराने के आदेश दिए थे, लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकी।

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यह है सरकारी मानक

नए आदेश के तहत ईंट भट्ठों को बस्ती, स्कूल, अस्पताल, कोर्ट और सरकारी दफ्तरों से 800 मीटर की दूरी पर ही खोले जाने के निर्देश हैं। ईंट-भट्ठों को नदियों से कम से कम 500 मीटर दूर होना चाहिए। नेशनल हाईवे से 300 मीटर और स्टेट हाईवे तथा रेलवे लाइन से 200 मीटर दूरी निर्धारित की गई है। दो ईंट भट्ठों के बीच की दूरी एक किलोमीटर से कम नहीं होनी चाहिए।

जिला स्तर पर गठित है कमेटी
ईंट-भट्ठों की जांच के लिए जिला स्तर पर कमेटी गठित की गई है। अपर जिलाधिकारी के नेतृत्व में इस कमेटी में संबंधित तहसील के उप जिलाधिकारी, जिला खनन अधिकारी, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी, प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी, राज्य कर विभाग और जीएसटी के अधिकारी शामिल किए गए हैं, लेकिन कभी पूरी कमेटी एक साथ जांच के लिए नहीं उतरती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक क्षेत्रीय अधिकारी हैं, जिन्हें चार मंडलों का चार्ज है। वह एक दिन ही जिले को दे पाते हैं।


नोटिस का जवाब व शुल्क न देने पर बंद होगा संचालन
जिला खनन अधिकारी प्रशांत यादव ने बताया कि अक्टूबर से ही नया सत्र शुरू हो गया है। 80 ईंट भट्ठों ने विनियमन शुल्क जमा कर दिया है। शेष सभी ईंट-भट्ठा संचालकों को नोटिस दी गई है। 15 पाया वाले ईंट-भट्ठों के लिए 91 हजार 100 रुपये का शुल्क निर्धारित है। अधिक पाया वालों के लिए यह शुल्क डेढ़ लाख रुपये तक है। कोई भट्ठा मालिक यदि नवंबर तक अपना शुल्क नहीं जमा करता है तो उन्हें शुल्क पर 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। इसके बाद भी यदि शुल्क नहीं जमा होता है तो संचालन बंद कराया जाएगा।


शासन के निर्देशानुसार सभी ईंट-भट्ठों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सहमति लेना अनिवार्य है। बस्ती में सिर्फ 137 भट्टों को सहमति पत्र दिया गया है। अन्य को नोटिस दी गई है। प्रशासन का सहयोग लेकर ऐसे ईंट-भट्ठों को बंद कराया जाएगा, जो नियम के विपरीत संचालित हो रहे हैं।
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-आरबी सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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