search

तीन तलाक से कैसे अलग और किस मौके पर बोला जाता है तलाक.... पढ़ें क्या होता है तलाक-ए-हसन?

deltin33 2025-11-20 00:08:12 views 851
  

तलाक-ए-हसन को लेकर जानकारी।  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मुस्लिम समुदाय में तलाक की एक प्रक्रिया तलाक-ए-हसन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। अदालत ने कहा कि किसी सभ्य समाज में इसकी इजाजत दी जा सकती है? दरअसल, पति के उपस्थित हुए बिना अपने वकील के माध्यम से तलाक भेजने केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस कोटिश्वर सिंह की पीठ ने संकेत दिया है कि वह तलाक-ए-हसन को रद करने पर विचार कर सकती है। बेनजीर हीना बनाम भारत संघ एवं अन्य के मामले में पीठ ने संकेत दिया कि वह इस मामले को पांच जजों की पीठ को सौंप सकते हैं। तो आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी डिटेल-
किस बारे में है जनहित याचिका?

दरअसल, याचिकाकर्ता बेनजीर हिना को उनके पति यूसुफ ने तलाक-ए-हसन के जरिए एकतरफा तलाक दिया। इसके बाद उन्होंने यह प्रार्थना की कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 की धारा 2 को शून्य घोषित किया जाए। इस धारा के तहत मुसलमानों को एकतरफा तलाक देने की इजाजत देती है।

याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि तलाक-ए-हसन संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन करता है। जनहित याचिका में लिंग और धर्म तटस्थ प्रक्रिया के आधार पर दिशानिर्देश की भी मांग की गई है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में शायरा बानो बनाम भारत संघ और अन्य मामले में तत्काल तीन तलाक को अमान्य कर दिया था और मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 लागू हुआ।
क्या है तलाक-ए-हसन?

जागरण डिजिटल से खास बातचीत में ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना एम साजिद रशीदी ने कहा, तलाक-ए-हसन का अर्थ है कि पति अपनी पत्नी को तीन बार पवित्रता (तुहर) के दौरान तीन बार तलाक दे। इसमें प्रत्येक तलाक एक अलग तुहर में दिया जाता है, अर्थात पहला तलाक एक तुहर में दिया जाएगा, फिर दूसरा तलाक अगले तुहर के बाद दिया जाएगा, और तीसरा तलाक तीसरे तुहर के बाद दिया जाएगा। यह तलाक के सुन्नत प्रकारों में से एक है।

  
तलाक-ए-हसन की व्याख्या

पहला तलाक: जब महिला मासिक धर्म से गुजरती है और फिर पवित्र हो जाती है, तो इस पवित्रता के दौरान, जिसमें पति ने संभोग नहीं किया है, पति पहला तलाक देगा।

दूसरा तलाक: उसके बाद, जब अगला मासिक धर्म आता है और फिर वह पवित्र हो जाती है, तो वह इस दूसरे तुहर में दूसरा तलाक देगा।

तीसरा तलाक: जब उसके बाद तीसरा तुहर आता है, तो वह तीसरा तलाक देगा।

जब महिला मासिक धर्म चक्र या गर्भावस्था से गुजर रही हो तो तलाक नहीं दिया जा सकता।
तीन तलाक से कैसे अलग?

तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) में शख्स एक बार में कई तलाक बोलता है। इसमें मियां-बीवी के बीच सुलह की कोई गुंजाइश नहीं होती और शादी मौके पर ही खत्म हो जाती है। तीन तलाक पर मिस्र, सीरिया, जॉर्डन, कुवैत, इराक और मलेशिया जैसे कई मुस्लिम देशों में प्रतिबंध लगा दिया गया है।

यह भी पढ़ें: \“क्या सभ्य समाज को इसकी इजाजत देनी चाहिए\“, सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-हसन को रद करने का दिया संकेत
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4510K

Credits

administrator

Credits
455817

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com