deltin55 Publish time 1970-1-1 05:00:00

सनातन को खत्म करना ही होगा कहने वाले उदयनिधि ...


नई दिल्ली। सनातन के खिलाफ अक्सर जहर उगलने वाले डीएमके विधायक और तमिलनाडु के नेता विपक्ष उदयनिधि स्टालिन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री विजय के सामने विधानसभा में सनातन को खत्म करना ही होगा कहने वाला मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
गौरतलब है कि कुछ साल पहले भी उदयनिधि ने सनातन पर इसी तरह की टिप्पणी की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार भी लगाई थी। हालांकि, इस बार टिप्पणी तमिलनाडु विधानसभा के भीतर की गई है।




लाइव लॉ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने याचिका दायर करते हुए उदयनिधि द्वारा सनातन धर्म को खत्म करने वाली टिप्पणी का जिक्र है। यह अर्जी एक अवमानना याचिका के तहत दाखिल की गई है। शाहीन अब्दुल्ला बनाम भारत संघ मामले में दायर एक रिट याचिका से कनेक्ट है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। यह अवमानना याचिका अमिता सचदेवा नाम की वकील ने दायर की।
अर्जी में क्या कहा गया?

अर्जी में कहा गया है कि हेट स्पीच और इस तरह के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के साफ आदेश के बाद भी पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ ऐक्शन नहीं लिया। हालांकि, यह याचिका उनके पुराने बयान पर 29 अप्रैल को दायर की गई थी, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ बेंच ने स्वीकार भी कर लिया था। लेकिन अब फिर से इसमें जोड़ा गया है कि तमिलनाडु विधानसभा की कार्रवाही के दौरान भी उदयनिधि ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही है।




सनातन वाले बयान पर उदयनिधि की आई सफाई

इससे पहले, सितंबर, 2023 में एक कार्यक्रम में उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू-मलेरिया से की थी और इसे खत्म किए जाने की बात कही थी। तब भी मामले पर काफी विवाद हुआ था और भाजपा समेत तमाम दलों के नेताओं ने हमला बोला था। हालांकि, अब तमिलनाडु वाली टिप्पणी पर उदयनिधि की सफाई आई है। उन्होंने कहा है कि हम किसी भी भगवान की आस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि जाति के आधार पर जो भेदभाव होता आया है, उसका विरोध करते हैं।




'मैं डरने वाला इंसान नहीं हूं'

एक्स पर एक पोस्ट में, विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि ने कहा, जब मैंने तमिलनाडु विधानसभा में बात की, तो मैंने कहा था कि लोगों को बांटने वाली जाति व्यवस्था को खत्म कर देना चाहिए। कुछ लोग इस बात के लिए मेरी आलोचना करते हैं। मैं डरने वाला इंसान नहीं हूं। द्रविड़ आंदोलन विरोध से ही उभरा था। इस लिहाज से, मैं एक छोटी सी सफाई देना चाहूंगा।''
अपनी सफाई देते हुए उदयनिधि ने कहा कि जाति व्यवस्था को खत्म करने का मतलब धर्म या पूजा का विरोध नहीं समझा जाना चाहिए। जब मैं कहता हूं कि जाति व्यवस्था खत्म होनी चाहिए, तो इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को भी मंदिर नहीं जाना चाहिए। सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए, न सिर्फ मंदिर में, बल्कि समाज में भी।




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National Desk



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