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राहुल गांधी की आय से अधिक संपत्ति का मामला: ह ...


नई दिल्ली/लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सीबीआई, ईडी, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ कथित तौर पर अनुपातहीन संपत्ति होने के आरोप वाली एक याचिका पर आठ हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करें।
जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जफर अहमद की डिवीजन बेंच ने कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर की क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। शिशिर खुद कोर्ट में पेश हुए थे। चैंबर में हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश वकील ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को 11 मई के लिखित निर्देशों के आधार पर बताया कि जांच एजेंसी को याचिकाकर्ता की शिकायत मिल गई है और वह आठ हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करेगी।




इसी तरह, ईडी के वकील ने जस्टिस चौहान की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने 9 मई के निर्देशों के आधार पर बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकने वाली इस केंद्रीय एजेंसी को भी शिकायत मिल गई है और वह आरोपों की जांच कर सकती है।
दलीलों को रिकॉर्ड करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह उम्मीद की जाती है कि यदि याचिकाकर्ता की शिकायत प्राप्त हुई है, तो शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कानून के अनुसार की जाएगी। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि सीबीआई या ईडी कानून के तहत अनुमत उचित कदम उठा सकती हैं।




इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस मामले में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व विभाग और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के माध्यम से भारत संघ को अतिरिक्त पक्ष के रूप में शामिल करने की भी अनुमति दी।
इसमें निर्देश दिया गया कि सभी पक्ष, जिनमें नए शामिल किए गए अधिकारी भी शामिल हैं, आठ हफ्तों के भीतर अपने-अपने जवाबी हलफनामे दाखिल करें और याचिकाकर्ता की शिकायत के संबंध में हुई प्रगति का ब्योरा रिकॉर्ड पर रखें।




जस्टिस चौहान की अध्यक्षता वाली बेंच ने आगे आदेश दिया कि मामले में दाखिल की गई पेपर-बुक और दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में ही रहें और इलाहाबाद हाई कोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार की सुरक्षित हिरासत में रखे जाएं। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को तय की गई है और इस पर फिर से इन-चैंबर कार्यवाही के दौरान विचार किया जाएगा।
इससे पहले, 6 मई को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की शुरुआती दलीलें सुनने के बाद निर्देश दिया था कि पूरी पेपर-बुक को सीलबंद करके सुरक्षित हिरासत में रखा जाए। साथ ही, प्रतिवादी अधिकारियों को इस मामले में निर्देश लेने के लिए समय दिया था।




शिशिर वही याचिकाकर्ता हैं जिनकी याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पहले उत्तर प्रदेश पुलिस को दोहरी नागरिकता के आरोपों को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने पर विचार करने और जांच करने का निर्देश दिया था। हालांकि, जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल-न्यायाधीश बेंच ने, जिन्होंने बाद में इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था, उस निर्देश को वापस ले लिया था। बेंच ने यह टिप्पणी की थी कि गांधी, जो कि एक संभावित आरोपी हैं, को ऐसा कोई भी आदेश पारित करने से पहले सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।






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Deshbandhu Desk



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