Cabinet meet : चीन से आने वाली FDI की शर्तों में मिली ढील, कैबिनेट ने कई अहम फैसलों पर लगाई मुहर
Cabinet meeting : अब एक तय सीमा में चीन से आने वाली FDI को सरकार की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।आज हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने शर्तों में ढील देने का फैसला किया है। साथ ही कैबिनेट ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड और कॉर्पोरेट लॉ अमेंडमेंट बिल को भी मंजूरी दे दी है। कैबिनेट के बड़े फैसले के तहत चीन से आने वाले FDI की शर्तों में ढील देने के लिए Press Note 3 में बदलाव का फैसला लिया गया है। एक सीमा तक FDI की शर्तों में ढील दी गई है। तय सीमा तक बिना सरकार की मंजूरी के FDI आ सकेगा।पहले के नियम के तहत,भारत के साथ ज़मीनी बॉर्डर शेयर करने वाले देशों की कंपनियों को (या ऐसे देशों में फ़ायदेमंद मालिकाना हक रखने वाली कंपनियों को)भारत में किसी भी सेक्टर में निवेश करने से पहले सरकार से ज़रूरी मंज़ूरी लेनी होती थी। यह नियम सात पड़ोसी देशों पर लागू होता है। इनमें चीन,बांग्लादेश, पाकिस्तान,भूटान,नेपाल,म्यांमार और अफ़गानिस्तान शामिल हैं।
हाल के सालों में ज़्यादा जांच-पड़ताल और कड़ाई के कारण,भारत के कुल FDI इनफ़्लो में चीन का हिस्सा काफ़ी कम है। आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल 2000 और दिसंबर 2025 के बीच,निवेश करने वाले देशों में चीन 23वें नंबर पर था। इसने इस अवधि में 2.51 अरब डॉलर का निवेश कियाजो भारत में हुए कुल FDI इक्विटी इनफ़्लो का सिर्फ़ 0.32 फीसदी है।
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जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते बहुत खराब हो गए। इस घटना के बाद,भारत ने इन्वेस्टमेंट नियमों को सख्त कर दिया और TikTok, WeChat और Alibaba के UC Browser समेत 200 से ज़्यादा चीनी मोबाइल एप्लीकेशन पर बैन लगा दिया। हालांकि,भारत में चीनी FDI सीमित रहा है,लेकिन दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार में काफी बढ़ोतरी हुई है। चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बनकर उभरा है।
वित्त वर्ष 2025 में,चीन को भारत का एक्सपोर्ट वित्त वर्ष 2024 के 16.66 अरब डॉलर से 14.5% घटकर 14.25 अरब डॉलर रह गया। हालांकि,इसी समय में इम्पोर्ट 101.73 अरब डॉलर से 11.52 फीसदी बढ़कर 113.45 अरब डॉलर हो गया। इससे ट्रेड डेफिसिट 85 अरब डॉलर से बढ़कर 99.2अरब डॉलर हो गया।
वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल और जनवरी के बीच, चीन को भारत का एक्सपोर्ट 38.37% बढ़कर 15.88 अरब डॉलर हो गया,जबकि इम्पोर्ट 13.82% बढ़कर 108.18 अरब डॉलर हो गया, जिससे ट्रेड डेफिसिट 92.3 अरब डॉलर रह गया।
इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड में बदलाव को भी मिली मंजूरी
इसके अलावा इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड में बदलाव और कॉर्पोरेट लॉ अमेंडमेंट बिल को भी मंजूरी मिली गई है। जलजीवन मिशन को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव भी पास हो गया है। जेवर एयरपोर्ट से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के प्रस्ताव को भी मान लिया गया है। ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी की लागत बढ़कर 3630 करोड़ रुपए हो जाएगी। इसके अलावा गुजरात के धोलेरा में नया एयरपोर्ट बनाने का फैसला भी लिया गया है।
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