भारत में अभी नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम, ईरान जंग के बीच सामने आई ये बड़ी जानकारी
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। इस तबाही के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया, जिसके कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ है। हालांकि, अभी तक भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price) में इजाफा नहीं हुआ है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना नहीं है।देश में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
सरकार के सूत्रों के मुकाबिक, आने वाले समय में रिटेल फ्यूल स्टेशनों पर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की उम्मीद नहीं है। उनका कहना है कि सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के पास बढ़ती लागत को संभालने की पर्याप्त क्षमता है। इस बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 9 मार्च को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। दिन में एक समय इसकी कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक चली गई थी, हालांकि बाद में यह घटकर करीब 102 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। जब कच्चे तेल की कीमतें पहले भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गई थीं, तब भी सरकारी तेल कंपनियों ने तुरंत पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें नहीं बढ़ाई थीं। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में इन कंपनियों की आर्थिक स्थिति काफी बेहतर रही है, इसलिए वे बढ़ती लागत का असर खुद झेल सकती हैं।
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इतनी है अभी क्रूड ऑयल की कीमत
सरकारी सूत्रों ने बताया कि फिलहाल कच्चे तेल की कीमतें लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के साथ मिलकर तेल के भंडार जारी करने की कोई योजना नहीं बना रहा है, क्योंकि भारत इस संगठन का सदस्य नहीं है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका असर भारत पर भी पड़ा है, क्योंकि भारत के लगभग 40–50 प्रतिशत तेल आयात इसी रास्ते से होते हैं। इसी वजह से इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। संघर्ष से पहले जहां करीब 138 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर सिर्फ 3 जहाज रह गई है।
जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट
एक सरकारी अधिकारी ने मनीकंट्रोल को बताया कि खाड़ी क्षेत्र में जारी संकट के कारण फ्रेट और इंश्योरेंस की लागत चार से पांच गुना तक बढ़ गई है। ग्रांट थॉर्नटन भारत में ऑयल एंड गैस सेक्टर के पार्टनर सौरव मित्रा ने कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से होर्मुज स्ट्रेट के आसपास रुकावटें पैदा हो गई हैं। इससे कच्चे तेल की सप्लाई और उत्पादन दोनों पर असर पड़ा है और स्थिति कुछ हद तक अस्थिर हो गई है। उन्होंने बताया कि जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो आम तौर पर ONGC और OIL जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों को फायदा होता है। उनकी कमाई सीधे कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों से जुड़ी होती है। लेकिन इसके उलट डाउनस्ट्रीम कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ता है। वजह यह है कि वे बढ़ी हुई लागत पूरी तरह से ग्राहकों पर नहीं डाल पातीं। इससे उनकी रिफाइनिंग और मार्केटिंग से होने वाली कमाई (मार्जिन) कम हो जाती है।
एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहती हैं और तनाव की स्थिति बनी रहती है, तो डाउनस्ट्रीम कंपनियों पर इसका असर कम करने के लिए सरकार कुछ कदम उठा सकती है। एक तरीका यह हो सकता है कि सरकार रिफाइनिंग और मार्केटिंग कंपनियों को धीरे-धीरे बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालने की अनुमति दे। दूसरा विकल्प यह है कि सरकार ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कम कर दे, जिससे बढ़ती कीमतों का असर कम किया जा सके।
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