Budget Session: अमेरिका-ईरान जंग पर भारत का क्या रुख, जयशंकर कल संसद में देंगे जवाब
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर सोमवार को संसद में इस मुद्दे पर जानकारी देंगे। वे सांसदों को क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और भारत के रुख के बारे में बताएंगे। बता दें कि, सोमवार से संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू हो रहा है। माना जा रहा है कि यह सत्र काफी हंगामेदार हो सकता है। सत्र की शुरुआत में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष भी संसद में बड़ा मुद्दा बन सकता है।कल संसद में हो सकती है चर्चा
बता दें कि, शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी ने इस मामले पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की थी। पार्टी का कहना था कि सिर्फ सरकार की ओर से बयान देना पर्याप्त नहीं है और इस मुद्दे पर पूरी चर्चा होनी चाहिए। पीटीआई के अनुसार, कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की है।
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उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर जवाबी हमलों के कारण पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। इसके अलावा हिंद महासागर में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों से भी हालात और गंभीर हो गए हैं। जयराम रमेश ने कहा कि इस मुद्दे पर संसद में पूरी और गंभीर चर्चा होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया के देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय काम करते हैं, जिनकी जिंदगी, रोज़गार और सुरक्षा पर इस संकट का असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को हर साल इस क्षेत्र से करीब 50 से 60 अरब डॉलर या उससे ज्यादा का रेमिटेंस मिलता है। इसलिए यह सिर्फ विदेश नीति का नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ा बहुत अहम मुद्दा है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से कांग्रेस संसद में पश्चिम एशिया की स्थिति पर तुरंत चर्चा की मांग करेगी।
50 हजार से ज्यादा भारतीय लौटे देश
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र से अब तक 52,360 से ज्यादा लोग भारत लौट चुके हैं। दरअसल, अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष की वजह से खाड़ी देशों के आसमान में उड़ानों का संचालन प्रभावित हो रहा है। इसके कारण मिडिल ईस्ट में हवाई यात्रा लगातार बाधित हो रही है।
28 फरवरी से दुबई, कतर, कुवैत और बहरीन के एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द (कैंसिल) की गई हैं, जिससे हजारों यात्री प्रभावित हुए हैं। बढ़ते तनाव के कारण कई एयरलाइंस को अपनी उड़ानें रीशेड्यूल या अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ी हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे इस संघर्ष का असर भारत के कई बड़े एयरपोर्ट पर भी देखने को मिला है। बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शुक्रवार को एयरस्पेस पाबंदियों के कारण 33 फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं। इसी तरह कोलकाता एयरपोर्ट पर भी अबू धाबी और दुबई में हुई हड़ताल के बाद खाड़ी देशों की उड़ानों को रोक दिया गया। इस दौरान एयरलाइंस ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई उड़ानों को स्थगित किया, हालांकि गुरुवार को फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट थोड़ी देर के लिए उतर पाई थी।
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