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कुशेश्वरस्थान हिंसा के घायलों का डीएमसीएच में इलाज जारी, मंत्री ने की मुलाकात

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डीएमसीएच के ऑर्थो वार्ड में चल रहा इलाज। जागरण



संवाद सहयोगी, दरभंगा । कुशेश्वरस्थान हिंसा में घायल दो लोगों का इलाज डीएमसीएच के ऑर्थो वार्ड में चल रहा है। हरिपुर निवासी विक्रम पासवान की 14 वर्षीय पुत्री कोमल कुमारी (14) को डाक्टरों ने सोमवार को डिस्चार्ज कर दिया। लेकिन पिता अशर्फी पासवान (45) अभी भर्ती हैं, जिनके बाएं पैर का तलवा सूजा हुआ है।

पिता ने मंत्री के सामने यह चिंता जताई कि बेटी अकेले घर पर कैसे रहेगी, क्योंकि मां भी अस्पताल में उनके साथ हैं। इस पर फिलहाल कोमल को अस्पताल में रहने की अनुमति दे दी गई।

मंगलवार को अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र पासवान डीएमसीएच पहुंचे और घायलों से मुलाकात की। तीसरे घायल भोला पासवान के पुत्र अविनाश पासवान (28) के दाहिने हाथ में स्टील का राड लगाया गया है।

पिता ने बताया कि पहले लगाए गए टांके टूट गए थे, जिन्हें दोबारा ठीक कर बैंडेज किया गया। उनका आरोप है कि डाक्टरों ने गंभीर चोट को साधारण बताकर डिस्चार्ज करने की कोशिश की, लेकिन मंत्री के आने के बाद उन्हें रोक दिया गया।

घायल विक्रम पासवान ने बताया कि सरकार की ओर से मुआवजे की पहली किस्त के रूप में छह लोगों को एक-एक लाख रुपये दिए गए हैं। उनके माता-पिता को 25-25 हजार रुपये मिले हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गांव के कुछ लोग निजी डाक्टरों से इलाज करा रहे हैं, जिन्हें किसी तरह की सरकारी मदद नहीं मिल सकी है। फिलहाल डीएमसीएच के आर्थो वार्ड में डा. रामाशीष यादव की यूनिट में दो मरीज भर्ती हैं। जबकि कोमल कुमारी को छुट्टी दी जा चुकी है, लेकिन मां के तीमारदारी में डीएमसीएच में रहने की वजह से वह घर नहीं जा रही है।


घायलों में किसी को मेजर चोट नहीं है। आर्थो विभाग के यूनिट हेड डा. रामाशीष यादव की देखरेख में इलाज हो रहा है और कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है। कभी-कभी आपरेशन के दौरान राड को थोड़ा बाहर रखना पड़ता है ताकि वह हड्डी में न घुसे और जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके। जहां तक कंधा टूटने की बात है, वह टूटा ही नहीं है, केवल दर्द के कारण मरीज को ऐसा महसूस हो रहा है। बुधवार को भी खुद उन्होंने मरीज से मुलाकात की है। स्थिति गंभीर नहीं है और घर जाने योग्य है। सब कुछ ठीक है, कहीं बोन इंज्युरी नहीं है।
डा. जगदीश चंद्र, अधीक्षक, डीएमसीएच।
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