‘दिल का टूटना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं’, दिल्ली हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी; आरोपी को जमानत
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/25/article/image/delhi-High-court-(1)-1771850935335-1772023730652-1772023746616_m.webpdelhi High court (1)जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। धर्म बदलने के लिए मजबूर करके आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपित को जमानत देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने कहा, “प्रेम के रिश्ते का टूटना आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं है।“ अपीलकर्ता नूर मोहम्मद की अपील काे स्वीकार करते हुए पीठ ने कहा, “आजकल टूटे हुए रिश्ते और दिल टूटना आम बात हो गई है, लेकिन सिर्फ रिश्ता टूटना अपने आप में उकसाने का मामला नहीं बन सकता।“
धर्म बदलने की शर्त
दरअसल, 27 साल की महिला ने अक्टूबर 2025 में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसके पिता ने बाद में पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर नूर मोहम्मद पर आरोप लगाया था कि शादी करने के लिए उसने धर्म बदलने को शर्त बनाकर उसे आत्महत्या के लिए उकसाया। पिता की शिकायत पर आरोपित को गिरफ्तार किया गया था और उसने जमानत देने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी।
अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि वह आठ साल तक महिला के साथ संबंध में रहा और उन्होंने शादी करने की तैयारी की थी। हालांकि, महिला के परिवार ने उनके धर्म अलग होने की वजह से रिश्ते का विरोध किया और इसके बाद वे अलग हो गए।
महिला ने कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा
अदालत ने रिकाॅर्ड पर लिया कि महिला ने कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा था, जिसमें अपीलकर्ता को दोषी ठहराया गया हो या इतना बड़ा कदम उठाने की कोई वजह बताई गई हो। अदालत ने कहा कि मरने से पहले दिया गया कोई बयान भी नहीं है, जिससे यह पता चले कि मरने वाली के दिमाग में क्या चल रहा था, जब उसने इतना बड़ा कदम उठाया।
दूसरी औरत से शादी करते देख हुई दुखी
कोर्ट ने पाया कि उनके आठ साल के संबंध में, महिला ने आरोपित के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की। अदालत ने यह भी कहा कि उसके दोस्तों के बयानों से पता चलता है कि महिला अपीलकर्ता को दूसरी औरत से शादी करते देखकर कितनी दुखी थी। अदालत ने कहा कि साफ तौर पर, यह टूटे हुए रिश्ते का मामला लगता है और संभावना है कि मृतका ने अपीलकर्ता के किसी और से शादी करने की बात पता चलने पर खुद को खत्म करने का फैसला किया हो।
जमानत पर रिहा करने का आदेश
अदालत ने आरोपित को 25,000 रुपये के निजी मुचलके व इतनी ही राशि के एक जमानती पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही, कहा कि आरोपित पीड़ित परिवार के सदस्य से संपर्क नहीं करने करेगा और न ही उन्हें प्रभावित करने की कोशिश करेगा।
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