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यूपी के इस जिले में छत से सड़क तक बंदरों का कहर, 5 दिन में 10 लोगों पर किया अटैक

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यूपी के इस जिले में छत से सड़क तक बंदरों का कहर



जागरण संवाददाता, कौशांबी। नगर पालिका क्षेत्र मंझनपुर में इन दिनों बंदरों का आतंक चरम पर है। बीते पांच दिनों के भीतर बंदरों के हमले में 10 लोगों को जख्म मिल चुका है। घायलों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। लगातार हो रही घटनाओं से नगरवासियों में दहशत का माहौल है। लोग घरों की छतों पर जाने और बच्चों को अकेले बाहर भेजने से कतरा रहे हैं।

दो मार्च को होली है। रंगो के इस पर्व पर महिलाएं घर की छतों पर चिप्स, पापड़ बना कर सुखाने के लिए डाल रही है। मोहल्लों में बंदरों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं। छतों पर रखे अनाज, कपड़े और अन्य सामान को नुकसान पहुंचाना आम बात हो गई है।

राह चलते लोगों के हाथ से खाद्य सामग्री छीन लेना और विरोध करने पर काट लेना उनकी आदत बन गई है। कई लोगों को उपचार के लिए मेडिकल कालेज में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाना पड़ा। ऐसा ही बुधवार को मेडिकल कालेज में देखने को मिला जहां पर बन्दर के काटने से प्रियांस, शांति देवी, रामराज यादव व कमलेश आदि ने अस्पताल पहुंच कर रैबीज का इंजेक्शन लगवाया।

अभी हाल ही में कोर्ट ने सभी नगर पालिका और नगर पंचायतों को कुत्तों व बंदरों को पकड़ने तथा उनकी रोकथाम के निर्देश दिए हैं। बावजूद मंझनपुर में हालात जस के तस बने हुए हैं।

नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल बंदरों को पकड़वाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर पालिका से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन बंदरों को पकड़ने की कोई ठोस व्यवस्था अब तक नहीं की गई।

बोली महिलाएं


होली के लिए पापड़ और चिप्स बनाने की तैयारी चल रही थी। जैसे ही छत पर सामान सुखाने डाला, बंदरों का झुंड आ धमका। विरोध करने पर एक बंदर काटने के लिए दौड़ पड़ा। किसी तरह दरवाजा बंद कर जान बचाई। अब हालात ऐसे हैं कि डर के मारे छत पर नहीं जा पाते। रोजमर्रा का काम भी प्रभावित हो रहा है और त्योहार की तैयारियां अधूरी पड़ी हैं। -विनीता केशरवानी

हम बच्चों को अकेले बाहर नहीं भेज रहे हैं। स्कूल से लौटते समय भी डर बना रहता है। बंदर अचानक हमला कर देते हैं और हाथ से टिफिन या खाना छीन लेते हैं। कई बार तो वे झपट्टा मारकर बच्चों को गिरा भी देते हैं, जिससे चोट लगने का खतरा बना रहता है। मोहल्ले में हर समय बंदरों का झुंड घूमता दिखाई देता है। - कमला सोनी

बंदरों के धर पकड़ की जिम्मेदार नगर पालिका व ग्राम पंचायतों की है। वन विभाग के पास बंदरों को पकड़ने के लिए कोई निर्देश नहीं है। वह खुद बंदरों को पकड़वाए व उन्हें जंगलों में ले जाकर छोड़े। -पंकज शुक्ला, डीएफओ


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