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Rohini Vrat 2026: रोहिणी व्रत का क्या है भगवान कृष्ण से कनेक्शन?

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रोहिणी व्रत का महत्व (Image Source: AI-Generated)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रोहिणी व्रत (Rohini Vrat) हिंदू धर्म में विशेष रूप से जैन समुदाय और सौभाग्य की कामना करने वाली महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, जब आकाश मंडल में रोहिणी नक्षत्र (Rohini Nakshatra) का उदय होता है, तब रोहिणी व्रत रखा जाता है। यह व्रत केवल एक उपवास नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि और परिवार की खुशहाली का माध्यम माना जाता है। साल 2026 में भी श्रद्धालु इस व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ रखेंगे।
रोहिणी नक्षत्र और भगवान कृष्ण का रहस्य

रोहिणी नक्षत्र का नाम आते ही भगवान श्री कृष्ण की याद आती है। धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में ही हुआ था। यही कारण है कि इस नक्षत्र को बेहद शुभ और ऊर्जावान माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से जातक को भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) और कृष्ण का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन के सारे कष्ट मिट जाते हैं।
रोहिणी व्रत की तिथि और नियम

रोहिणी व्रत आमतौर पर तब शुरू होता है, जब सूर्योदय के समय रोहिणी नक्षत्र प्रबल होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र 27 नक्षत्रों में चौथा नक्षत्र है और इसका स्वामी चंद्रमा है।

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि यानी 25 फरवरी मतलब आज ही ये व्रत है। आज रोहिणी नक्षत्र का संयोग दोपहर 01 बजकर 38 मिनट तक था। इस अवधि में पूजा-अर्चना करना बहुत ही शुभ माना गया है।

शुरुआत: इस व्रत की शुरुआत रोहिणी नक्षत्र के उदय के साथ होती है।

विधि: इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर भगवान वासुदेव या जैन धर्म के अनुयायी भगवान पार्श्वनाथ की पूजा करते हैं।

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(Image Source: AI-Generated)

पारण: इस व्रत का समापन तब होता है जब रोहिणी नक्षत्र समाप्त होकर अगला नक्षत्र (मृगशिरा) शुरू होता है।
व्रत के लाभ और फल

शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से सुखद वैवाहिक जीवन और संतान की लंबी आयु के लिए किया जाता है। जैन धर्म में ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से कर्मों के बंधन ढीले पड़ते हैं और आत्मा को शांति मिलती है। यह व्रत गरीबी दूर करने और घर में धन-धान्य की वृद्धि करने वाला माना गया है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है। https://www.jagranimages.com/images/womenday2_780x100.jpghttps://www.jagranimages.com/images/womendayANI2_380x100.gif
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