बिहार के सीमांचल से मोदी सरकार का संदेश : घुसपैठ और बदलती डेमोग्राफी पर गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/25/article/image/Amit-Shah-BIHAR-Seemanchal-Visit-1772002946245_m.webpबिहार के सीमांचल दौरे पर अमित शाह: घुसपैठ, बदलती डेमोग्राफी और सुरक्षा चुनौतियों के बीच विकास के संकेत। फाइल फोटो - नरेन्द्र मोदी व अमित शाह।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का प्रस्तावित सीमांचल दौरा सुरक्षा और विकास दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किशनगंज, अररिया और पूर्णिया में होने वाले कार्यक्रमों के दौरान सीमा पार घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज नेटवर्क और बदलते डेमोग्राफी स्वरूप जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।
पिछले चुनावी अभियान में भी उन्होंने सीमांचल में अवैध घुसपैठ को बड़ी चुनौती बताया था। ऐसे में यह दौरा जमीनी स्तर पर कार्रवाई और रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। ठीक वैसे ही जैसे बीते वर्षों में माओवादियों की समाप्ति के लिए व्यापक स्तर पर सफल अभियान चलाया गया।
सीमांचल और देश के चिकन नेक क्षेत्र को रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील मानते हुए केंद्र सरकार यहां आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में जुटी है। किशनगंज में सेना स्टेशन के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है, वहीं एसएसबी मुख्यालय, सीआरपीएफ कैंप और बीएमपी कैंप स्थापित करने की योजना है। रेलवे कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए लगभग 40 किलोमीटर लंबी टनल परियोजना पर भी काम प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त पैरा कमांडो के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की तैयारी को सुरक्षा दृष्टि से अहम कदम माना जा रहा है।
घुसपैठ के कई मामले आ चुके हैं सामने
घुसपैठ के मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। गत वर्ष अगस्त में एसएसबी ने बंगाल सीमा पर एक युवक को पकड़ा, जिसने अपना नाम रतुल खान बताया। तलाशी में उसके पास से बांग्लादेश का पहचान पत्र मिला, जिसमें उसका नाम मुहम्मद मानिक दर्ज था। उसके पास भारतीय आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र की प्रतियां, बैंक पासबुक और भूमि दस्तावेज समेत 14 संदिग्ध कागजात बरामद हुए। यह मामला बताता है कि घुसपैठ केवल सीमा पार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पहचान बदलकर व्यवस्था में घुलने-मिलने तक फैला है।
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[*]सीमांचल और चिकन नेक में आधारभूत ढांचे का विस्तार, सेना स्टेशन से लेकर पैरा कमांडो ट्रेनिंग सेंटर तक की तैयारी
इसी तरह किशनगंज के ठाकुरगंज क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा से सटे मलिनगांव पंचायत के गिलहबाड़ी गांव में हाल में फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले रैकेट का खुलासा हुआ। जियारपोखर थाना पुलिस की छापेमारी में अशरफुल नामक संदिग्ध एजेंट गिरफ्तार हुआ। मौके से फर्जी आधार कार्ड, लैपटाप, प्रिंटर, स्कैनर, बायोमेट्रिक उपकरण आदि मिले। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह गिरोह बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारतीय दस्तावेज उपलब्ध करा रहा था ताकि वे अवैध रूप से रह सकें और सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकें। गिरोह से जुड़े जमाल और पंकज नामक दो लोग सीमावर्ती इलाके का फायदा उठाकर नेपाल की ओर भाग निकले।
बदल रही डेमोग्राफी
घुसपैठ को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि स्थानीय स्तर पर डेमोग्राफी यानी जनसंख्या संरचना में बदलाव की चर्चा तेज हुई है। बंगाल और नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर अन्य इलाकों की तुलना में अधिक बताई जाती है। इसके साथ सीमा क्षेत्र में इनके धार्मिक स्थलों और नई बस्तियों के विस्तार की भी चर्चा होती रही है, जिसका प्रभाव सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य पर भी पड़ रहा है। सीमांचल की राजनीति में एआइएमआइएम की बढ़ती सक्रियता को भी इसी संदर्भ में जोड़कर देखा जाता है। किशनगंज जिले में नेपाल सीमा से सटे ठाकुरगंज से टेढ़ागाछ तक कई नई बस्तियों के बसने की बात सामने आती रही है। स्थानीय आकलन के अनुसार पिछले दो दशकों में आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आतंकी कनेक्शन भी आ चुका है सामने
दिल्ली से गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकी अशरफ का किशनगंज कनेक्शन सामने आना भी जांच एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बना है। बताया जा रहा है कि वह बांग्लादेश के रास्ते भारत आया, बाद में अजमेर होते हुए किशनगंज पहुंचा और यहां कोचाधामन क्षेत्र में एक सरपंच की मदद से पहचान पत्र बनवाया। उसी आधार पर दिल्ली में उसकी पहचान स्थापित हुई। https://www.jagranimages.com/images/womenday2_780x100.jpghttps://www.jagranimages.com/images/womendayANI2_380x100.gif
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