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SIR in UP: एक ही संतान पर छह पिता का दावा, नोटिस देख चकरा रहे मतदाता

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एक ही संतान पर छह पिता का दावा - AI Generated_Image



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण -एसआइआर अभियान के तहत शुरू की गई ‘लाजिकल डिस्क्रिप्शन’ प्रक्रिया ने हजारों मतदाताओं को उलझन में डाल दिया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज तकनीकी और तर्कहीन त्रुटियों को चिन्हित कर सुधारना है, लेकिन लगातार नोटिस मिलने से लोग परेशान हो रहे हैं।

जिले में अब तक करीब छह लाख मतदाताओं के नाम इस प्रक्रिया के तहत चिन्हित किए गए हैं। संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजकर उनसे आयु, पारिवारिक संबंध या अन्य विवरण से जुड़े प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। निर्वाचन विभाग का कहना है कि यह कदम मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाने के लिए उठाया गया है।

इस प्रक्रिया में ऐसे मामलों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां डेटा तर्कसंगत नहीं लगता। उदाहरण के तौर पर यदि किसी पिता की आयु 15 वर्ष दर्ज है, या एक ही व्यक्ति को छह से अधिक मतदाताओं का पिता दिखाया गया है, तो उसे संदिग्ध माना जा रहा है।

नोटिस देख चकरा रहे मतदाता

तुर्कमानपुर में एक परिवार के दो सदस्यों को नोटिस भेजकर बताया गया कि उन्हें ऐसे व्यक्ति का पुत्र/पुत्री दर्शाया गया है, जिसे छह अन्य लोग भी पिता बता रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि- आपके और आपके दादा-दादी के बीच की उम्र का अंतर 40 साल से कम है। इससे गलत मिलान की आशंका जताई गई है। नोटिस पढ़कर घरवालों का माथा चकरा गया। उनका कहना है कि मतदाता सूची बनाने वालों की गलती की सजा उन्हें भुगतनी पड़ रही है।

इसी तरह सदर तहसील के शिवपुर क्षेत्र में एक महिला मतदाता को नोटिस दिया गया कि उनके और उनके माता-पिता के बीच उम्र का अंतर 15 वर्ष से कम है। परिवार के अन्य सदस्यों को पिता के नाम में अंतर और उम्र के असंगत अंतर को लेकर नोटिस भेजे गए हैं।

कई मतदाताओं का कहना है कि पहले भी विशेष पुनरीक्षण के दौरान दस्तावेज जमा किए गए थे, फिर दोबारा नोटिस क्यों भेजा जा रहा है? गंभीर बात यह है कि दूसरी बार भेजे गए नोटिस के बारे में कई बीएलओ (बूथ लेवल आफिसर) को या तो पूरी जानकारी नहीं है या वे मतदाताओं को सही से जानकारी नहीं दे रहे जिससे उनमें असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

नाराजगी के चलते कुछ लोगों ने जरूरी प्रमाण पत्र देने से भी इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि बार-बार कागजी प्रक्रिया से उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है।

हालांकि उप जिला निर्वाचन अधिकारी विनीत सिंह का कहना है कि पूरी प्रक्रिया के पीछे का मकसद मतदाता सूची को ज्यादा से ज्यादा पारदर्शी बनाने का है। ऐसे मामलों में किसी को व्यक्तिगत सुनवाई में आने की जरूरत नहीं है। मतदाता अपने दस्तावेज संबंधित बीएलओ को दे सकते हैं, जिनके सत्यापन के बाद सूची में सुधार किया जाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी आधार पर की जा रही है और इसका उद्देश्य किसी का नाम हटाना नहीं, बल्कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना है।
फिलहाल, पारदर्शिता के दावे के बीच जमीनी स्तर पर बेहतर संवाद और स्पष्ट जानकारी की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि मतदाता भ्रम और नाराजगी से बच सकें। https://www.jagranimages.com/images/womenday2_780x100.jpghttps://www.jagranimages.com/images/womendayANI2_380x100.gif
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