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झारखंड में 17 करोड़ से अधिक मुआवजा राशि लावारिस, सड़क दुर्घटना पीड़ितों को नहीं मिल रहा हक

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मनोज सिंह, रांची। सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ित परिवारों को राहत देने के लिए अदालतें मुआवजे का आदेश तो दे रही हैं। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि बड़ी संख्या में परिवार इस राशि को लेने आगे ही नहीं आ रहे।

झारखंड में करोड़ों रुपये का मुआवजा वर्षों से बिना दावे के पड़ा है, जो न केवल जागरूकता की कमी, बल्कि सिस्टम की खामियों को भी उजागर करता है।

राज्य में सड़क दुर्घटना मामलों में वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) द्वारा पारित आदेशों के बावजूद अब तक 14.59 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि बिना दावे के पड़ी हुई है। यानी जिन पीड़ित परिवारों के पक्ष में अदालत ने भुगतान का आदेश दिया, वे अब तक राशि लेने सामने नहीं आए हैं।

इसी तरह लेबर कोर्ट के मामलों में भी 2.68 करोड़ रुपये की राशि बिना दावा के लंबित हैं। इन सभी मामलों की विस्तृत जानकारी हाई कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध है, जहां केस नंबर के साथ संबंधित मुआवजा राशि का भी उल्लेख किया गया है।
धनबाद और हजारीबाग में सबसे अधिक राशि लंबित

सबसे अधिक बिना दावे की राशि धनबाद और हजारीबाग में है। धनबाद में 77 सड़क दुर्घटना मामलों में अदालत ने मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन करीब 7.83 करोड़ रुपये अब भी बिना दावा के पड़े हैं। इसमें 7.42 करोड़ सड़क दुर्घटना से जुड़े मामलों की राशि है, जबकि 41.34 लाख रुपये अन्य मद के हैं।

हजारीबाग में 79 मामलों में 3.43 करोड़ रुपये के भुगतान का आदेश हुआ, जो अब तक लंबित है। वहीं रांची में 1.39 करोड़ रुपये सड़क दुर्घटना और 12.05 लाख रुपये लेबर कोर्ट के आदेश के बावजूद बिना दावा के जमा हैं।
चार जिलों में शत-प्रतिशत भुगतान

हालांक, कुछ जिलों में यह स्थिति बेहतर भी है। गुमला, जामताड़ा, कोडरमा और लातेहार में अदालत के आदेश के बाद मुआवजा राशि का शत-प्रतिशत भुगतान हो चुका है।

गुमला में 2.30 करोड़, जामताड़ा में 22.06 लाख, कोडरमा में 48.52 लाख और लातेहार में 56.38 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

मोटर दुर्घटना मामलों में प्रक्रिया को तेज करने के लिए झारखंड पुलिस को निर्देश है कि दुर्घटना में मौत के मामलों की जांच रिपोर्ट एक महीने के भीतर ट्रिब्यूनल को भेजी जाए। इसमें 14 बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी देना अनिवार्य है, ताकि मुआवजा 
प्रक्रिया में देरी न हो।

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार केवल समय सीमा के आधार पर मोटर दुर्घटना क्लेम याचिका खारिज नहीं की जा सकती। वहीं, लोगों को जागरूक करने के लिए हाई कोर्ट ने एक विशेष डैशबोर्ड भी शुरू किया है, जहां बिना दावा की पड़ी राशि का पूरा विवरण उपलब्ध है।

मई 2025 के नए निर्देशों के तहत अब मुआवजा याचिका में आधार और पैन कार्ड का विवरण देना भी अनिवार्य कर दिया गया है ताकि सही लाभार्थी तक राशि पहुंच सके।

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