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गोरखपुर में निगरानी पर सवाल, जेल से छूटे बदमाश कर रहे ताबड़तोड़ वारदात

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84 लाख की डकैती से लेकर कोतवाली में हुई फायरिंग की वारदात में रहे शामिल। जागरण



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पिछले डेढ़ महीने में जिले में हुई सनसनीखेज वारदातों ने कानून-व्यवस्था और जेल से छूटे बदमाशों की निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पांच जनवरी को एम्स क्षेत्र में रिटायर्ड लेखपाल के घर 84 लाख रुपये की डकैती से शुरू हुआ अपराधों का सिलसिला 20 फरवरी को कोतवाली क्षेत्र में छात्रनेता के घर फायरिंग तक जारी रहा। जांच में सामने आया कि इनमें से अधिकतर वारदातों में हाल ही में जेल से छूटे बदमाश शामिल थे।

पांच जनवरी को एम्स क्षेत्र में एक रिटायर्ड लेखपाल के घर 84 लाख रुपये की डकैती डाली गई। जांच में पता चला कि इस वारदात में शामिल हिस्ट्रीशीटर डायना व उसके साथी कुछ दिन पहले ही जेल से छूटे थे। इसके बाद 17 जनवरी को जेल गेट से ही एक युवक का अपहरण कर लिया गया और फिरौती मांगी गई।

इस मामले में भी जेल से बाहर आए बदमाशों की भूमिका सामने आई। तीन फरवरी को गगहा क्षेत्र में भाजपा नेता को गोली मार दी गई। इस घटना में शामिल आरोपित भी जेल से रिहा हुए थे। इसके बाद 20 फरवरी को कोतवाली क्षेत्र के आर्यनगर में छात्रनेता उज्ज्वल यादव के घर ताबड़तोड़ फायरिंग हुई।

मुख्य आरोपित आर्थक सिंह, विपिन व अनीश का आपराधिक इतिहास मिला। 21 फरवरी को तिवारीपुर क्षेत्र में मनबढ़ों ने दिनदहाड़े पथराव और तोड़फोड़ कर अफरा-तफरी मचा दी।लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जेल से छूटने के बाद इन बदमाशों की निगरानी क्यों नहीं की गई?

पुलिस के पास हिस्ट्रीशीटरों और पेशेवर अपराधियों का डेटा होने के बावजूद वे बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। बीते साल दिसंबर में ही एसएसपी ने जमानतदारों के सत्यापन का अभियान चलाने के निर्देश दिए थे।

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इसके बावजूद जमानत पर छूटे बदमाशों पर प्रभावी निगरानी न हो पाने की वजह से हालात बिगड़े हैं। डीआइजी रेंज ने जेल से छूटे बदमाशों के वारदात करने पर नाराजगी जताते हुए सबका सत्यापन करने के साथ ही कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

निगरानी के लिए शुरू हुआ था आपरेशन ब्रह्मस्त्र
जेल से छूटे बदमाशों की निगरानी के लिए पहले भी कई अभियान चलाए जा चुके हैं। 2023 में एडीजी ने \“आपरेशन ब्रह्मास्त्र\“ शुरू किया था, जिसके तहत हर जिले के 50-50 हिस्ट्रीशीटरों की जीपीएस से निगरानी करने की योजना थी । इसके अलावा पेशेवर अपराधियों की सूची भी तैयार की गई थी, जिसमें गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज और देवरिया के 141 पेशेवर अपराधी शामिल थे । लेकिन इन अभियानों का असर फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।


जेल से छूटे पेशेवर बदमाशों की निगरानी के लिए रेंज के सभी जिलों में विशेष सत्यापन अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। रेंज कार्यालय से इसकी मानिटरिंग की जाएगी। लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय की जाएगी।
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- डा. एस चनप्पा, डीआइजी रेंज https://www.jagranimages.com/images/womenday780x100.png?v1https://www.jagranimages.com/images/womendayANI380x100.gif
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