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क्लैट-यूजी 2026 की मेरिट लिस्ट पुनरीक्षित करने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोक लगाई, अगली सुनवाई नौ मार्च को

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क्लैट-यूजी 2026 मेरिट लिस्ट मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया।



विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें क्लैट यूजी- 2026 की मेरिट लिस्ट को पुनरीक्षित करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा है कि वर्तमान मेरिट लिस्ट के अनुसार काउंसलिंग जारी रहेगी। साथ ही विशेषज्ञ पैनल की राय के आधार पर संपूर्ण मेरिट लिस्ट संशोधित करने का निर्देश स्थगित रहेगा।

कोर्ट ने कहा विपक्षी याची को प्राविजनल प्रवेश दिया जा सकता है लेकिन यह अपील के निर्णय पर निर्भर करेगा। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह तथा न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के संघ (कंसोर्टियम आफ नेशनल ला यूनिवर्सिटीज) के संयोजक के माध्यम से दायर विशेष अपील की सुनवाई करते हुए दिया है।

खंडपीठ ने कहा, सभी उम्मीदवारों को 1.25 अंक देने का निर्णय उचित नहीं है, क्योंकि इससे अन्य उम्मीदवारों के अधिकारों पर प्रभाव पड़ सकता है। आगे की कार्रवाई के लिए विशेषज्ञ पैनल की राय लेनी चाहिए। कोर्ट को बताया गया कि मूल याची अवनीश गुप्ता का चयन हो चुका है और उसे सोनीपत स्थित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए काउंसलिंग की पेशकश संभव है।

कोर्ट ने कहा, अपील लंबित रहने तक याची को अनंतिम प्रवेश दिया जा सकता है। यह परिणाम के अधीन रहेगा, जिसके परिणामस्वरूप उसे उच्चतर/बेहतर संस्थान में प्रवेश मिल सकता है। साथ ही यदि याची इस मुकदमे से इतर किसी भी माध्यम से किसी उच्चतर संस्थान में प्रवेश का पात्र हो जाता है तो भी यह लाभ अपील लंबित रहने के बावजूद प्रदान किया जा सकता है।

कंसोर्टियम के अधिवक्ता का कहना था कि गाजियाबाद निवासी याची अवनीश गुप्ता के इस तर्क को स्वीकार करने में एकलपीठ ने गलती की है कि पुस्तिका ‘सी’ के प्रश्न संख्या 9 के दो उत्तर ‘बी’ और ‘डी’ सही थे। विशेषज्ञ पैनल ने मूल याची की आपत्ति को स्वीकार कर लिया है लेकिन ओवर साइट कमेटी (निगरानी समिति) ने उस सिफारिश को गलत साबित कर दिया। याची ने सभी अभ्यर्थियों को 1.25 अंक देने की कोई मांग नहीं की है।
यह था मामला

पूर्व में विवादित प्रश्न के लिए दो उत्तर सही मिलने पर न्यायमूर्ति विवेक सरन की एकलपीठ ने कंसोर्टियम को निर्देश दिया था कि विकल्प ‘बी’ और ‘डी’ दोनों को सही मानकर मेरिट लिस्ट संशोधित कर महीने भर में पुनः प्रकाशित करें। ओवरसाइट कमेटी ने एक्सपर्ट कमेटी के निर्णय को बिना कारण बताए पलट दिया था। उसने सिर्फ विकल्प ‘बी’ को सही माना था। एकलपीठ ने पाया था कि ओवरसाइट कमेटी के निर्णय में कोई तर्क नहीं है। ऐसे में विशेषज्ञ समिति के निर्णय को ही माना जाएगा।

कंसोर्टियम के इस तर्क को भी खारिज कर दिया था कि इलाहाबाद हाई कोर्ट को सुनवाई करने का अधिकार नहीं है क्योंकि अथॉरिटी कर्नाटक में पंजीकृत है। कहा था कि अगर किसी मामले में थोड़ा सा भी ‘कॉज ऑफ एक्शन’ अदालत के क्षेत्र में होता है तो सुनवाई करने का अधिकार है।
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