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टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का मोर्चा तेज, सड़क से सदन तक लड़ाई का एलान

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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। राजधानी में रविवार को हुई बैठक में विभिन्न संगठनों ने मिलकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ (जेटीएफआई) का गठन किया और शिक्षक हितों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।

बैठक में अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील पांडेय ने कहा कि टीईटी के मुद्दे पर लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने इसे शिक्षकों के अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए हर मोर्चे पर संघर्ष जारी रखने की बात कही।

विशिष्ट बीटीसी शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि शिक्षकों ने नियुक्ति के समय सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी कर नौकरी प्राप्त की है, ऐसे में अब उन्हें टीईटी के बिना अपात्र बताना पूरी तरह गलत है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी ने सरकार से आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार रहने की बात कही।

वहीं बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि महासंघ शिक्षकों का किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने देगा और संघर्ष अब और तेज होगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि नौ मार्च से 15 मार्च तक ‘शिक्षकों की पाती’ नाम से ईमेल और पोस्टकार्ड अभियान चलाया जाएगा।

इसके तहत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष को पत्र भेजे जाएंगे। इसके बाद जिलों में मशाल जुलूस निकाले जाएंगे। तीन मई को लखनऊ घेराव किया जाएगा और यदि मांगें नहीं मानी गईं तो मानसून सत्र में संसद भवन का घेराव किया जाएगा। संचालन दिलीप चौहान ने किया।

शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ने पर जिलों में सौंपे जाएंगे धन्यवाद पत्र

उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ की रविवार को राजधानी में हुई बैठक में शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाए जाने पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया गया। पदाधिकारियों ने निर्णय लिया कि 24 फरवरी से दो मार्च के बीच सभी जिला अध्यक्ष अपने-अपने जिलों में सरकार के मंत्रियों और विधायकों से मिलकर मुख्यमंत्री के नाम धन्यवाद पत्र सौंपेंगे।

बैठक में शिक्षकों से जुड़े कई मुद्दे भी उठाए गए। संघ ने मांग की कि वरिष्ठता के आधार पर जिला से बाहर ट्रांसफर की नीति जल्द जारी की जाए, ताकि 400 से 500 किलोमीटर दूर कार्यरत शिक्षक अपने गृह जिलों में आ सकें। साथ ही 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों के जीपीएफ और बीमा भुगतान समय से कराने पर भी जोर दिया गया।

संघ ने कहा कि अलग-अलग जिलों में कार्यरत शिक्षक दंपतियों को एक ही जिले में स्थानांतरण का आदेश जारी होना चाहिए। सरकार ने शिक्षामित्रों को ‘होली गिफ्ट’ दिया है और भविष्य में शिक्षामित्र भी सरकार के प्रति समर्थन जताएंगे।

बैठक में प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव, उपाध्यक्ष प्रदीप जायसवाल़ महामंत्री संदीप दत्त सहित अन्य मौजूद रहे। संचालन अजित सिंह ने किया।
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