बेंगलुरु की झीलों पर संकट: एक में भी पीने या नहाने लायक पानी नहीं, रिपोर्ट
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/23/article/image/bengluru-(2)-1771788420685_m.webpबेंगलुरु की झीलों में पीने योग्य पानी नहीं (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) के हालिया आंकड़ों बेंगलुरु शहर की एक भी झील का पानी पीने या नहाने के लायक नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, बेलंदूर और वर्थुर जैसी प्रतिष्ठित झीलें भारी प्रदूषण के कारण \“डी\“ और \“ई\“ श्रेणी में बनी हुई हैं।
दरअसल, अप्रैल और नवंबर 2025 के बीच किए गए जल गुणवत्ता विश्लेषण के अनुसार, शहर की 147 झीलों में से एक भी झील सुरक्षित मानकों (श्रेणी ए या बी) पर खरी नहीं उतरी है। यानी इन झीलों का पानी मानवीय उपयोग तो दूर, पशुओं के लिए भी असुरक्षित हो चुका है।
चौंकाने वाली बात यह है कि बेंगलुरु शहर की सबसे ज्यादा प्रदूषण से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में प्रतिष्ठित झीलें भी शामिल हैं। बेंगलुरु की कई सबसे प्रसिद्ध झीलों में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक पाया गया। अधिकांश झीलों को डी या ई श्रेणी में रखा गया, जो भारी प्रदूषण का संकेत देता है।
बेलंदुर झील-
अप्रैल में इसे ई रेटिंग दी गई थी, गर्मियों के दौरान यह थोड़े समय के लिए डी रेटिंग तक सुधरी, लेकिन नवंबर तक आते-आते यह वापस ई रेटिंग पर आ गई।
वर्थुर झील-
डी और ई श्रेणियों के बीच उतार-चढ़ाव देखा गया।
हेब्बल झील-
अधिकांश महीनों तक डी श्रेणी में बनी रही, फिर धीरे-धीरे ई श्रेणी में आ गई।
अन्य गंभीर रूप से प्रभावित झीलों में मडीवाला, काइकोंडनहल्ली, कुंडलाहल्ली और उल्सूर (सभी डी/ई श्रेणी की) शामिल हैं, जबकि सैंकी टैंक की श्रेणी डी बनी हुई है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, तेजी से शहरीकरण और अनुपचारित अपशिष्ट निर्वहन के कारण झीलें सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
पारिस्थितिक आपातकाल की चेतावनी
पर्यावरण कार्यकर्ता और फ्रेंड्स ऑफ लेक्स की सह-संस्थापक माधुरी सुब्बाराओ ने कहा, “बेंगलुरु की कई झीलें पारिस्थितिक पतन के कगार पर हैं। आज हम एक भी ऐसी झील नहीं बता सकते जिसकी जल गुणवत्ता अच्छी हो, पारिस्थितिकी स्थिर हो या जैव विविधता सुरक्षित हो। अधिकांश झीलें स्वीकार्य मानकों से नीचे हैं, और उनका पानी पशुओं के उपभोग के लिए भी अनुपयुक्त है।“
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