देश में एक दशक में चार गुना बढ़ा अंग प्रत्यारोपण, फिर भी 82 हजार मरीज प्रतीक्षा सूची में
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/22/article/image/human-organ-1771781007313_m.webpअंगदान का इंतजार कर रहे मरीजों की लंबी प्रतीक्षा सूची बड़ी चुनौती बनी हुई है। प्रतीकात्मक तस्वीर
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान और केंद्र सरकार की सक्रियता के बाद देश में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में उल्लेखनीय बढ़ोतरी तो हुई है पर, अंगदान का इंतजार कर रहे मरीजों की लंबी प्रतीक्षा सूची बड़ी चुनौती बनी हुई है।
नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (नोटो) के अनुसार वर्ष 2024 में देशभर में कुल 18,911 अंग प्रत्यारोपण किए गए, जो अब तक का सर्वाधिक वार्षिक आंकड़ा है। वर्ष 2013 में यह संख्या मात्र 4,990 थी। इस प्रकार अंगदान मामले में एक दशक में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है।
लंबी है मरीजों की सूची
वर्ष 2024 में देश में 13,476 किडनी (गुर्दा) प्रत्यारोपण, 4,901 लीवर (यकृत), 253 हृदय, फेफड़े तथा अन्य अंगों के प्रत्यारोपण संपन्न हुए। भारत अब कुल प्रत्यारोपण संख्या के आधार पर विश्व में तीसरे स्थान पर है। इसके बावजूद मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। नोटो के वर्तमान आंकड़ों के अनुसार देशभर में लगभग 82,000 से अधिक मरीज अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में दर्ज हैं। इनमें लगभग 60,000 से अधिक गुर्दा, 18,000 से अधिक यकृत, तथा शेष हृदय और फेफड़े के मरीज शामिल हैं।
प्रत्यारोपण जीवित दाताओं पर निर्भर
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में मृतक अंगदाता (डिसीज्ड डोनर) की दर अभी भी दस लाख आबादी पर एक से कम है, जो वैश्विक मानकों की तुलना में काफी कम है। यही कारण है कि अधिकतर प्रत्यारोपण जीवित दाताओं पर निर्भर हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर कहा था कि अंगदान मामलों की यह उपलब्धि चिकित्सा विशेषज्ञों, समन्वयकों और अंगदाताओं के परिजनों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा था कि सरकार पारदर्शी आवंटन प्रणाली, हरित गलियारा व्यवस्था और जनजागरूकता अभियानों को और मजबूत कर रही है।
हालांकि प्रगति उत्साहजनक है, परंतु बढ़ती प्रतीक्षा सूची यह संकेत देती है कि जागरूकता, मृतक अंगदान की स्वीकृति और स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार की दिशा में निरंतर प्रयास आवश्यक हैं, ताकि हजारों मरीजों को समय पर जीवनदान मिल सके।
दिल्ली की स्थिति
[*]वर्ष 2024 में दिल्ली देश में किडनी प्रत्यारोपण के प्रमुख केंद्रों में शामिल रही।
[*]राष्ट्रीय प्रतीक्षा सूची के अनुसार लगभग 8,800 से अधिक मरीज दिल्ली में अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में पंजीकृत हैं।
[*]इनमें सर्वाधिक संख्या गुर्दा प्रत्यारोपण के मरीजों की है।
[*]दिल्ली में प्रत्यारोपण की सुविधा उन्नत है, लेकिन मृतक अंगदान की संख्या सीमित है।
[*]वर्ष 2020 से 2025 के बीच प्रतीक्षा के दौरान मृत्यु अंगदान के मामलों में दिल्ली देश में शीर्ष राज्यों में रही है।
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