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F-22 रैप्टर: दुनिया का सबसे घातक स्टील्थ फाइटर, दूसरे देशों को क्यों नहीं बेचता अमेरिका?

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दुनिया का सबसे घातक स्टील्थ फाइटर दूसरे देशों को क्यों नहीं बेचता अमेरिका (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों की बात होती है तो F-22 रैप्टर का नाम सबसे ऊपर आता है। इसे हवाई वर्चस्व यानी \“एयर डॉमिनेंस\“ के लिए बनाया गया है। यह विमान स्टील्थ तकनीक, सुपरक्रूज क्षमता, जबरदस्त रफ्तार, अत्याधुनिक सेंसर और एकीकृत एवियोनिक्स सिस्टम से लैस है।

इसकी खासियत सिर्फ इसकी ताकत नहीं है, बल्कि यह दुश्मन को दिखे बिना हमला करने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि इसे 21वीं सदी की अमेरिकी वायुसेना की रीढ़ माना जाता है।

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हालांकि इसकी ताकत और तकनीक के बारे में काफी चर्चा होती है, लेकिन इस विमान से जुड़े कई ऐसे तथ्य भी हैं जो आम लोगों को कम ही पता हैं। आइए आसान शब्दों में समझते हैं F-22 रैप्टर की पूरी कहानी।
F-22 को विदेशों में क्यों नहीं बेचा जाता?

दुनिया के कई देशों को अमेरिका अपना F-35 लड़ाकू विमान बेचता है, लेकिन F-22 रैप्टर को किसी भी देश को नहीं बेचा गया। इसकी वजह अमेरिकी कानून है। कानून के तहत इस विमान को निर्यात करने पर रोक है।

अमेरिका को डर था कि अगर इसकी स्टील्थ तकनीक, रडार सिस्टम और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक तकनीक किसी और देश तक पहुंची तो राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसलिए इसे केवल अमेरिकी वायुसेना के लिए ही रखा गया। यही कारण है कि F-22 दुनिया के उन गिने-चुने आधुनिक लड़ाकू विमानों में से है जो सिर्फ एक ही देश के पास हैं।

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बहुत छोटा है इसका बेड़ा

[*]F-22 की ताकत के बावजूद इसकी संख्या बहुत कम है। कुल मिलाकर सिर्फ 187 उत्पादन विमान बनाए गए। 2011 में इसका उत्पादन बंद कर दिया गया।
[*]शुरुआत में इससे ज्यादा विमान बनाने की योजना थी, लेकिन इसकी लागत बहुत ज्यादा थी और रक्षा प्राथमिकताओं में बदलाव आया। इसलिए कार्यक्रम को सीमित कर दिया गया।
[*]आज हर F-22 को बेहद कीमती माना जाता है। किसी एक विमान का नुकसान भी अमेरिकी वायुसेना के लिए बड़ी क्षति माना जाता है।

टाइटेनियम का इस्तेमाल

अक्सर F-22 की तुलना A-10 से की जाती है। A-10 में पायलट के चारों ओर टाइटेनियम की \“बैटटब\“ जैसी सुरक्षा दी गई है। लेकिन F-22 में ऐसा नहीं है। इसमें लगभग 40 प्रतिशत ढांचा टाइटेनियम से बना है, लेकिन इसका उद्देश्य पायलट को बुलेटप्रूफ सुरक्षा देना नहीं, बल्कि मजबूती और गर्मी सहन करने की क्षमता बढ़ाना है। तेज रफ्तार और हाई-जी मोड़ों के दौरान ढांचे को मजबूत रखने के लिए टाइटेनियम का उपयोग किया गया है।
जब कॉकपिट में फंस गया पायलट

2006 में एक अजीब घटना हुई। एक F-22 का कैनोपी नहीं खुला और पायलट अंदर फंस गया। ग्राउंड क्रू को चेनसॉ से कैनोपी काटकर पायलट को बाहर निकालना पड़ा। इस घटना में विमान को नुकसान हुआ और करीब 1.8 लाख डॉलर का खर्च आया। इस घटना के बाद कुछ समय के लिए F-22 उड़ानें सीमित की गईं और तकनीकी सुधार किए गए।
ऑक्सीजन सिस्टम की बड़ी समस्या

2008 से 2012 के बीच कई पायलटों ने उड़ान के दौरान चक्कर और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की। यह लक्षण हाइपोक्सिया जैसे थे, जिसमें शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती।
जांच में पता चला कि विमान के ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम में खामी थी। इस वजह से प्रशिक्षण और संचालन पर कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगाए गए।
बाद में तकनीकी सुधार किए गए, लेकिन इस घटना ने दिखाया कि सबसे उन्नत विमान भी तकनीकी समस्याओं से अछूते नहीं हैं।

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F-22 की सबसे बड़ी ताकत उसकी \“सुपरक्रूज\“ क्षमता है। इसका मतलब है कि यह बिना आफ्टरबर्नर का उपयोग किए ध्वनि की गति से तेज उड़ सकता है। ज्यादातर लड़ाकू विमानों को सुपरसोनिक गति के लिए आफ्टरबर्नर का सहारा लेना पड़ता है, जिससे ईंधन तेजी से खर्च होता है। लेकिन F-22 1.5 मैक से ज्यादा की गति पर बिना अतिरिक्त ईंधन खर्च के उड़ सकता है। इससे इसकी रेंज और रणनीतिक बढ़त दोनों बढ़ती हैं।
युद्ध अभ्यास में रिकॉर्ड

रेड फ्लैग जैसे युद्ध अभ्यासों में F-22 ने बेहद प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ अभ्यासों में इसका \“किल रेशियो\“ 144-0 तक रहा। यानी मुकाबले में दुश्मन के 144 विमान गिराए गए और खुद एक भी नहीं। यह इसकी स्टील्थ, सेंसर क्षमता और फुर्ती का नतीजा है, जिससे दुश्मन को प्रतिक्रिया का मौका ही नहीं मिलता।

F-22 का मुख्य उद्देश्य हवाई वर्चस्व स्थापित करना है। यह एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड दोनों तरह के मिशन कर सकता है। यह ग्लोबल स्ट्राइक टास्क फोर्स का महत्वपूर्ण हिस्सा है और लंबी दूरी तक तेजी से जाकर दुश्मन को जवाब देने के लिए बनाया गया है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह अमेरिकी वायुसेना, थलसेना, नौसेना और मरीन कॉर्प्स के लिए रास्ता साफ कर सके।
और क्या-क्या हैं विशेषताएं?

[*]इसमें अत्याधुनिक सेंसर और एवियोनिक्स सिस्टम हैं, जो पायलट को दुश्मन को पहले पहचानने और पहले हमला करने की क्षमता देते हैं।
[*]एयर-टू-एयर मिशन में यह छह AIM-120 और दो AIM-9 मिसाइलें ले जा सकता है।
[*]एयर-टू-ग्राउंड मिशन में यह दो 1000 पाउंड GBU-32 बम और साथ में एयर-टू-एयर मिसाइलें भी रख सकता है।
[*]इसमें दो प्रैट एंड व्हाइटनी F119 इंजन लगे हैं। हर इंजन लगभग 35000 पाउंड थ्रस्ट पैदा करता है।
[*]थ्रस्ट वेक्टरिंग तकनीक की मदद से यह हवा में बेहद तेज और तीखे मोड़ ले सकता है।
[*]इसकी अधिकतम गति मैक 2 श्रेणी की है और यह 50,000 फीट से अधिक ऊंचाई तक उड़ सकता है।
[*]एडवांस्ड टैक्टिकल फाइटर कार्यक्रम 1986 में शुरू हुआ। YF-22 और YF-23 प्रोटोटाइप बनाए गए।
[*]1990 में पहली उड़ान के बाद YF-22 को चुना गया। 1997 में पहली EMD उड़ान हुई।
[*]2005 में इसे पूर्ण उत्पादन की मंजूरी मिली और दिसंबर 2005 में इसे आधिकारिक रूप से F-22A नाम दिया गया।

रखरखाव क्षमता

F-22 की विश्वसनीयता और रखरखाव क्षमता को बेहतर बनाने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। FASTeR III नाम का 10 साल का अनुबंध 2028 से 2037 तक इसके रखरखाव के लिए लागू होगा। आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत इसमें नई डिजिटल तकनीक और ओपन सिस्टम आर्किटेक्चर जोड़ा जा रहा है।
F-22 की विशेषताएं

[*]भूमिका: एयर डॉमिनेंस, मल्टी-रोल फाइटर
[*]लंबाई: 62 फीट 1 इंच
[*]विंगस्पैन: 44 फीट 6 इंच
[*]अधिकतम टेकऑफ वजन: 83,500 पाउंड
[*]ईंधन क्षमता: 18000 पाउंड
[*]रेंज: लगभग 1850 मील

क्यों खास है F-22?

F-22 रैप्टर सिर्फ एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता का प्रतीक है। इसकी स्टील्थ क्षमता, सुपरक्रूज, उन्नत सेंसर और घातक हथियार इसे दुनिया के सबसे खतरनाक विमानों में शामिल करते हैं। हालांकि इसकी संख्या कम है और लागत ज्यादा रही, लेकिन जो क्षमता यह देता है वह अद्वितीय है।

30 साल से अधिक समय और 5 लाख उड़ान घंटों के बाद भी F-22 अमेरिकी वायुसेना की ताकत का अहम स्तंभ बना हुआ है। यह भविष्य के डिजिटल युद्ध के लिए भी खुद को लगातार अपग्रेड कर रहा है।

मिडिल ईस्ट में सेना भेजने की तैयारी में अमेरिका, बनाया बड़ा एयर ब्रिज
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