24 फरवरी से लग रहा है होलाष्टक, 8 दिन तक नहीं होंगे शुभ काम; इन कामों के लिए अत्यंत फलदायी
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/22/article/image/holashtak-1771759133063_m.webp24 फरवरी से लग रहा है होलाष्टक।
जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र। होली का त्योहार हिंदू धर्म में बड़े उत्साह व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन होली से ठीक आठ दिन पहले होलाष्टक लग जाता है। ज्योतिष ऋषभ वत्स ने बताया कि होलाष्टक का शुभारंभ 24 फरवरी को होने जा रहा है, इसका समापन तीन मार्च को होगा।
उन्होंने बताया कि जहां इस दौरान सभी तरह के शुभ व मांगलिक कामों को करने की मनाही हो जाती है। वहीं, पूजा व तंत्र कामों के लिए ये 8 दिन विशेष होते हैं। ग्रह उपचार के लिए भी ये दिन विशेष माने जाते हैं।
शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होती है शुरुआत
पंडित अभिषेक शर्मा ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन आठ दिनों के दौरान किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कामों को करने की मनाही होती है। होलाष्टक की शुरुआत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है और इसका समापन होलिका दहन के साथ हो जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन आठ दिनों में ही भक्त प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने बहुत यातनाएं दी थीं। आठवें दिन उन्हें होलिका की गोद में भस्म होने के लिए बिठाया गया था। ये आठ दिन भक्त प्रह्लाद के लिए घोर कष्ट और पीड़ा के थे, इसलिए हिंदू परंपरा में इन्हें अशुभ माना जाता है।
इस समय को तपस्या, भक्ति और पूजा-पाठ के लिए तो उत्तम माना जाता है, लेकिन किसी नई और सुखद शुरुआत के लिए इसे वर्जित रखा गया है।
इसी वजह से विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या व्यापार उद्घाटन, विवाह जैसे जरूरी कामों को इस दौरान टाल दिया जाता है, ताकि उनके नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सके। इस समय नामकरण या सगाई जैसे मांगलिक काम भी नहीं किए जाते।
फलदायी माना गया है समय
यह समय मंत्र साधना और ईश्वर की भक्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इस समय के दौरान जितना अधिक भगवान के नाम का जप किया जाता है, उतनी ही मानसिक शांति प्राप्त होती है।
इन दिनों में दान-पुण्य करना बहुत शुभ होता है विशेष रूप से जरूरतमंदों को अनाज और वस्त्रों का दान करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है। यह समय आत्म-मंथन और अपनी आंतरिक ऊर्जा को शुद्ध करने के लिए श्रेष्ठ है।
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