क्या आपका दूध पीने लायक है? हर 3 महीने में एक सैम्पल जांच में फेल, बड़े ब्रांड्स पर भी उठने लगे सवाल
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/22/article/image/Milk-Testing-Fail-1771758838100_m.webpखूब फल फूल रहा मिलावटी दूध का कारोबार। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपका दूध पीने लायक है? यह सवाल सबसे ज्यादा इसलिए भी पूछा रहा है क्योंकि हाल ही में ट्रस्टीफाइड की एक जांच में पता चला है कि टॉप डेयरी ब्रांड क्वालिटी पैरामीटर पर खरे नहीं उतरे।
ट्रस्टीफ़ाइड एक इंडिपेंडेंट लैब टेस्टिंग प्रोग्राम है। इसके टेस्ट से पता चला कि कुछ दूध के पाउच में कोलीफॉर्म का लेवल भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की तय लिमिट से 98 गुना ज्यादा था, जबकि दूसरों में टोटल प्लेट काउंट का लेवल सेफ लिमिट से बहुत ज्यादा था।
भारत दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक
एक तरफ जहां भारत दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक (लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा) है। वहीं दूसरी तरफ ये मिलावटी दूध के मामले में भी सबसे आगे है। हाल के वर्षों में जांचे गए दूध के हर तीन नमूनों मे से एक क्वालिटी जांच में खरे नहीं उतरे। एफएसएसएआई की ओर से 2025 में 38 प्रतिशत नमूने मिलावटी पाए गए।
एफएसएसएआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2015- 2018 के बीच मिलावटी दूध के नमूनों की संख्या 16.64 प्रतिशत अंक तक बढ़ गई। फिर वित्त वर्ष 2022 में 798 नमूनों में से आधे मिलावटी पाए गए।
उत्तर भारत के राज्यों में मिलावट के मामले ज्यादा
एफएसएसएआई की ताजा मिल्क सर्विलांस रिपोर्ट की अगर मानें तो उत्तर भारत के राज्यों में लिए गए अनपाश्चुराइज्ड दूध के करीब 47 प्रतिशत नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। जबकि दक्षिण भारत में यह आंकड़ा करीब 18 प्रतिशत था। वहीं, पश्चिम भारत में 23 और पूर्वी भारत में करीब 13 फीसदी दूध के नमूने मानकों में फेल हुए।
दूध में पानी, डिटर्जेंट और यूरिया की मिलावट
इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन की ओर से कुछ महीने पहले जांचे गए 330 दूध के सैंपल्स में से 233 (70.6 प्रतिशत) में एक या एक से ज्यादा मिलावट पाई गई। 193 नमूनों में पानी, 23.9 प्रतिशत में डिटर्जेंट और 9.1 प्रतिशत नमूनों में यूरिया की मिलावट पाई गई।
सोर्स- एफएसएसएआई
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