आनलाइन शाॅपिंग प्लेटफार्म मिंत्रा पर 55 हजार रुपये का जुर्माना, मंगाई जैकेट तो मिली छोटे बच्चे की जींस पैंट
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/22/article/image/myntra-1771745695506_m.webpमिंत्रा को लगा 55 हजार का झटका: जैकेट मंगाई, मिली बच्चे की जींस; उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला।
जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही)। वूलन जैकेट के स्थान पर बच्चे की हाफ जींस भेजने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने शनिवार को आनलाइन शापिंग प्लेटफार्म मिंत्रा पर 55 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसमें सेवा में कमी के लिए 25 हजार रुपये, मानसिक उत्पीड़न के लिए 25 हजार रुपये और वाद खर्च के लिए 5 हजार रुपये शामिल हैं।
जंगीगंज निवासी अरुण प्रकाश मोदनवाल ने जैकेट के लिए 26,520 रुपये आनलाइन भुगतान किया था। आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि कंपनी को जुर्माना के साथ उपभोक्ता का 26,520 रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाना होगा। यदि समय पर भुगतान नहीं किया गया, तो 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
अरुण प्रकाश ने 21 नवंबर 2023 को मिंत्रा के आनलाइन प्लेटफार्म से एक वूलेन जैकेट (बड़े आकार) 26,520 रुपये में खरीदी थी। जब उन्होंने पार्सल खोला, तो जैकेट के स्थान पर कम कीमत की बच्चे की हाफ जींस निकली। उन्होंने इसकी शिकायत की और रिटर्न करने का अनुरोध किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद, 21 फरवरी 2024 को उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की सुनवाई के दौरान मिंत्रा के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कंपनी केवल एक आनलाइन मार्केटिंग प्लेटफार्म है। इस पर आयोग ने कहा कि प्लेटफार्म उपभोक्ता के प्रति अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकता। आयोग ने स्पष्ट किया कि प्लेटफार्म का दायित्व है कि उसके माध्यम से बेचे जा रहे उत्पादों की डिलीवरी सही और विश्वसनीय हो।
आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार डे, सदस्य दीप्ति श्रीवास्तव और विजय बहादुर सिंह की पीठ ने कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए पीड़ित की 26,520 रुपये की धनराशि खरीद तिथि 21 नवंबर 2023 से निर्णय की तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया।
यह मामला उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और यह दर्शाता है कि आनलाइन शॉपिंग में उपभोक्ताओं को अपनी शिकायतों के लिए कानूनी सहारा लेने का अधिकार है। आयोग का यह निर्णय उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाता है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं और उन्हें उचित मुआवजा मिल सकता है।
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