ओडिशा के जंगलों में पिकनिक मनाने पर रोक, 1 मार्च से लागू होगा आदेश
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/22/article/image/Odisha-Forest-1771728160451_m.webpजंगलों में पिकनिक। फोटो एआई जनरेटेड
जागरण संवाददाता, अनुगुल। ग्रीष्म ऋतु के चरम पर संभावित विनाशकारी वन अग्निकांड को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है।
प्रशासन ने जिले के सभी वन क्षेत्रों में पिकनिक, सामाजिक समारोह, कैंपिंग और अन्य सामूहिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। यह आदेश 1 मार्च, 2026 से प्रभावी होगा और ओडिशा में मानसून की वर्षा शुरू होने तक लागू रहेगा।
प्रशासन के अनुसार गर्मी के मौसम में शुष्क वनस्पति, उच्च तापमान और तेज हवाओं के कारण जंगल अत्यधिक संवेदनशील हो जाते हैं। ऐसे में मानवजनित गतिविधियों से आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसी जोखिम को कम करने के उद्देश्य से यह व्यापक प्रतिबंध लगाया गया है।
अनुगुल जिले में आरक्षित और संरक्षित वन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा शामिल है। पिछले वर्षों में यहां वन अग्नि की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे पर्यावरण और वन्यजीवों को भारी नुकसान हुआ है। इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने इसे समयोचित और आवश्यक हस्तक्षेप बताया है।
वन क्षेत्रों में ज्वलनशील पदार्थ ले जाने पर रोक
आदेश के तहत संरक्षित जंगलों, प्रतिबंधित क्षेत्रों और ग्रामीण वन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के पिकनिक, सामाजिक समारोह, कैंपिंग या सामूहिक आयोजन की अनुमति नहीं होगी।
इसके साथ ही वन क्षेत्रों में माचिस, लाइटर, तेल या अन्य ज्वलनशील पदार्थ ले जाने और उपयोग करने पर भी रोक लगा दी गई है। किसी भी परिस्थिति में खुली आग, अलाव या ज्वलनशील सामग्री का उपयोग सख्त रूप से प्रतिबंधित रहेगा।
पर्यावरण बचाव में अहम कदम
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ये कदम जिले की जैव विविधता की रक्षा, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने तथा आसपास की मानव बस्तियों को आग के संभावित प्रसार से बचाने के लिए आवश्यक हैं। वन अग्नि से न केवल पेड़-पौधों का विनाश होता है, बल्कि वायु प्रदूषण, मिट्टी का कटाव और दीर्घकालिक पारिस्थितिक क्षति भी होती है।
उल्लंघन करने वालों के खिलाफ वन संरक्षण से संबंधित प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषियों पर जुर्माना, दंड और अभियोजन की कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि वन संरक्षण में जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
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